जिनेवा में होगी अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता
US-Iran Peace Talk (द भारत ख़बर), जिनेवा : अमेरिका और ईरान के बीच स्थाई शांति के लिए हुए समझौते के बाद आज स्विट्जरलैंड के जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता शुरू होने जा रही है। ज्ञात रहे कि 60 दिन के लिए हुए समझौते के कुल 14 बिंदू हैं। इन बिंदुओं पर आपसी सहमति बनाने के लिए ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल के बीच कई दौर की वार्ता होनी है।
इसी वार्ता के लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी स्विट्जरलैंड पहुंच चुका है। ईरानी संसद के अध्यक्ष एमबी गालिबाफ ने स्विट्जरलैंड में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ होने वाली तकनीकी वार्ता से पहले मिनाब स्कूल घटना के पीड़ितों को याद किया। उन्होंने कहा कि उनकी कुबार्नी वॉशिंगटन के साथ होने वाली बातचीत के दौरान इस्लामी गणराज्य ईरान के कदमों का मार्गदर्शन करेगी। यह वार्ता पश्चिम एशिया में शत्रुता समाप्त करने के लिए दोनों पक्षों के बीच हुए 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन के तहत आयोजित की जा रही है।
अमेरिकी कूटनीतिज्ञ स्विट्जरलैंड पहुंचे
इस बातचीत को लेकर अमेरिका बहुत गंभीर है। वाशिंगटन में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शनिवार को एक बड़ी बात कही। उन्होंने पुष्टि की कि अमेरिका के शीर्ष वातार्कार स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं। इन वातार्कारों में जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ शामिल हैं। ये दोनों अधिकारी वहां लगातार काम कर रहे हैं। वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े तकनीकी विवरणों को देख रहे हैं।
होर्मुज पर ये बोले अमेरिकी राष्ट्रपति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नेकहा कि अगर ईरान के साथ अंतिम समझौता नहीं हो पाता है तो वॉशिंगटन होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगा सकता है। उन्होंने कहा कि यह शुल्क पश्चिम एशिया क्षेत्र के लिए संरक्षक की भूमिका निभाने के बदले दी गई सेवाओं के लिए होगा।
समझौते के तहत अगले 60 दिन तक नहीं लगाएंगे शुल्क
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत लागू 60 दिनों के युद्धविराम के दौरान कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने लिखा, युद्धविराम की 60 दिनों की अवधि के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई शुल्क नहीं होगा और 60 दिन पूरे होने के बाद भी कोई शुल्क नहीं होगा, जब तक कि समझौता पूरा नहीं हो जाता। अगर समझौता पूरा नहीं होता है, तो अमेरिका द्वारा और उसके लिए शुल्क लगाया जा सकता है। यह मध्य पूर्व के देशों के लिए संरक्षक की भूमिका निभाने तथा अतीत, वर्तमान और भविष्य में हुए खर्चों की भरपाई के लिए होगा।
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