दोनों पक्षों की ताजा गोलाबारी से पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति, होर्मुज दोबारा से पूरी तरह बंद
West Asia Crisis (द भारत ख़बर), तेहरान : अमेरिका और ईरान के बीच दूसरी बार युद्ध लगातार तेज होता जा रहा है। एक तरफ जहां पिछले तीन दिन से अमेरिकी सेनाएं ईरान के अलग-अलग शहरों को निशाना बना रहीं हैं। तो वहीं ईरान भी उन देशों पर हमले कर रहा है जहां पर अमेरिकी सेना के बेस हैं। ताजा घटनाक्रम में जहां अमेरिका ने ईरान पर बड़े हमले करने की पुष्टि की है तो वहीं ईरान ने भी इस बात का दावा किया है कि उसने अमेरिकी सेना के बेस को निशाना बनाया है।
ईरान के इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया कि उसने जॉर्डन के प्रिंस हसन एयरबेस पर कई बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है। ईरानी सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने आईआरजीसी के हवाले से कहा कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने इस एयरबेस पर मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। आईआरजीसी के अनुसार, हमले में एयरबेस का कमान और नियंत्रण केंद्र तथा एमक्यू-9 ड्रोन रखने वाले हैंगर नष्ट कर दिए गए हैं।
ईरान को कीमत चुकानी होगी
ईरान पर तीसरे दौर के सैन्य हमले शुरू करने के बाद अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने एक्स पर लिखा कि ईरान ने गलत फैसला लिया। अब उसे इसकी कीमत चुकानी होगी। उसने आगे कहा, इसके जवाब में अमेरिका ईरान की उन क्षमताओं को लगातार कमजोर करके भारी कीमत वसूल रहा है, जिनके जरिये वह जलडमरूमध्य से स्वतंत्र रूप से गुजरने वाले नागरिक नाविकों और व्यावसायिक जहाजों पर हमला कर सकता है। अमेरिकी सेना की मध्य कमान (सेंटकॉम) ने कहा कि उसने ईरान पर तीसरे दौर के हमले शुरू कर दिए हैं।
ईरानी सेना ने होर्मुज में मालवाहक जहाज पर किया हमला
ईरान के इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने होर्मुज जलडमरूमध्य में साइप्रस के झंडे वाले एक मालवाहक जहाज पर खुलेआम हमला किया। सेंटकॉम के अनुसार, जहाज में आग लगने और इंजन क्षतिग्रस्त होने के कारण वह अपनी यात्रा जारी नहीं रख सका। साथ ही जहाज के चालक दल का एक सदस्य लापता है। अमेरिकी सेना ने कहा, व्यावसायिक जहाजों पर पहले हुए हमलों के लिए जवाबदेह ठहराए जाने के बाद ईरान को समझौते का पालन करने का एक और अवसर दिया गया था। लेकिन वह एक बार फिर ऐसा करने में विफल रहा। यह बयान उन्होंने 16 जून को हुए शांति समझौते के संदर्भ में दिया।
होर्मुज बंद होने से विश्व सप्लाई चेन होगी बाधित
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद मार्च में जब ईरान ने समुद्री यातायात का अहम मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर दिया था तो इससे विश्व सप्लाई चेन बुरी तरह से गड़बड़ा गई थी। विशेषकर एशिया में पेट्रोलियम पदार्थों और एलपीजी की किल्लत पैदा हो गई थी। अब दोबारा से यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो यह स्थिति फिर से सामने आ सकती है।
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