इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) को लेकर लोग अक्सर असमंजस में होते हैं कि उन्हें फाइल करना है या नहीं। लोग सोचते हैं कि उनकी सैलरी टैक्स ब्रैकेट में नहीं आती है, इसलिए उन्हें इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना जरूरी नहीं है। अगर आपकी सैलरी टैक्स के दायरे में नहीं आती है, तो ITR भरना अनिवार्य नहीं है, लेकिन इसे फाइल करने के कई फायदे जरूर हैं। इस रिपोर्ट में हम आपको उन फायदों के बारे में बताएंगे जो आपको ITR भरने से मिलते हैं, भले ही आपकी सैलरी टैक्स ब्रैकेट में न आती हो।
होम/ऑटो लोन का आवेदन
होम लोन या वाहन लोन के लिए अप्लाई करते समय ITR दिखाना अनिवार्य है। यह आपकी आय के स्रोत के सबूत के तौर पर काम करता है। इसके अलावा, कुछ क्रेडिट कार्ड/इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के दौरान भी ITR दिखाना पड़ सकता है।
रिफंड क्लेम
अक्सर कंपनियां TDS काटती हैं। TDS काटने के लिए आपकी सैलरी का टैक्स ब्रैकेट में आना जरूरी नहीं है। अगर आपको TDS के तौर पर काटी गई रकम को क्लेम करना है, तो ITR भरना जरूरी है।
वीजा के लिए आवेदन
अगर काम या किसी अन्य सिलसिले में आप विदेश जाने की सोच रहे हैं, तो वीजा पाने के लिए आपको ITR दिखाना पड़ सकता है। इसलिए, भले ही आपकी आय टैक्स ब्रैकेट में न आती हो, आपको ITR फाइल करने पर विचार करना चाहिए, क्योंकि कोई नहीं जानता आगे क्या होगा।
इनकम का प्रूफ है ITR
कई तरह के आवेदन करने में वेतनभोगी लोगों के लिए सैलरी स्लिप इनकम प्रूफ के तौर पर काम करता है। हालांकि, फ्रीलांसर और स्वरोजगार करने वाले लोगों के पास इस तरह का कोई दस्तावेज नहीं होता। ऐसे लोगों के लिए ITR इनकम प्रूफ के तौर पर काम करता है, जिसका इस्तेमाल कई तरह के मकसद के लिए किया जा सकता है।
नुकसान क्लेम करना
लोग कई तरह के ऐसेट में निवेश करते हैं, जैसे कि स्टॉक, बिटकॉइन, रियल एस्टेट आदि। कई बार ऐसी स्थिति हो जाती है कि कोई ऐसेट नुकसान उठाकर बेचना पड़ता है। क्या आपको मालूम है कि इस तरह के लॉस अगले 8 वर्षों तक कैरी फॉरवर्ड किए जा सकते हैं। यह तभी संभव है, जब टैक्स रिटर्न फाइल किया जाता है।

