अंबाला. किसी की तकलीफ देखकर आगे बढ़ जाना आसान है, लेकिन उसी तकलीफ को अपनी जिम्मेदारी समझकर मदद का हाथ बढ़ाना हर किसी के बस की बात नहीं होती है. अंबाला शहर के विशाल वर्मा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिन्होंने कोरोना काल में जब अस्पतालों में मरीजों और उनके परिवारों के सामने मुश्किलें खड़ी थीं, तब उन्होंने एक छोटी सी पहल शुरू की थी. आज वही पहल सेवा के ऐसे कारवां में बदल चुकी है, जिसमें 300 से ज्यादा लोग जुड़कर जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं. कोरोना महामारी के दौरान अंबाला नागरिक अस्पताल में चल रही अन्नपूर्णा कैंटीन के सामने भी कई तरह की जरूरतें थीं. स्वास्थ्य विभाग के अनुरोध पर विशाल वर्मा ने लोगों को साथ जोड़कर रोटी मेकिंग मशीन सहित मरीजों के लिए जरूरी सामान जुटाने की शुरुआत की.
सोमवार को खीर भंडारा
व्हीलचेयर और दूसरे आवश्यक उपकरण उपलब्ध करवाने के साथ ही उन्होंने अस्पताल में मरीजों के लिए सेवा का सिलसिला आगे बढ़ाया. सोमवार को खीर भंडारे से शुरू हुई सेवा धीरे-धीरे रोजाना खिचड़ी वितरण तक पहुंच गई. विशाल ने लोगों को जोड़ने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाया और देखते ही देखते मदद के लिए हाथ बढ़ाने वालों की संख्या बढ़ती गई. इसी सेवा भावना को संस्थागत रूप देने के लिए बाद में ओमकार सेवा वेलफेयर सोसाइटी का गठन किया गया.
सेवा का दायरा यहीं तक नहीं
लोकल 18 से विशाल वर्मा बताते हैं कि वह पेशे से सर्राफा कारोबारी हैं, लेकिन समाजसेवा के लिए समय निकालना उनके जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है. कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग के साथ शुरू हुआ काम आज लगातार आगे बढ़ रहा है. वर्तमान समय में अस्पताल में रोजाना 200 से अधिक मरीजों को फल वितरित किए जाते हैं. इसके अलावा समय-समय पर स्वास्थ्य जांच शिविर लगाकर कैंसर और दूसरी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए नि:शुल्क जांच की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है. विशाल के मुताबिक, सेवा का दायरा केवल भोजन और फल तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्था की ओर से टीबी मरीजों को भी गोद लेकर करीब छह महीने तक राशन उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि बीमारी के दौरान परिवार पर आर्थिक बोझ कुछ कम हो सके. उनकी संस्था नवजात बच्चों के लिए अस्पताल में बेबी किट भी देती है, जिसमें जरूरत का सामान शामिल होता है.
स्वास्थ्य मंत्रालय के पोर्टल पर ये संस्था
विशाल वर्मा का कहना है कि सेवा के साथ पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी है. इसी सोच के तहत उन्होंने नागरिक अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर क्षेत्र को अपनाकर वहां औषधीय पौधों का छोटा गार्डन तैयार करने का काम शुरू किया है. गर्मी के मौसम में अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए वाटर कूलर भी लगाया गया है. विशाल लोगों को योगासन भी सिखाते हैं. वह बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान से भी जुड़े हैं. वे कहते हैं कि सेवा के लिए हमेशा बड़ी रकम की जरूरत नहीं होती, जरूरत होती है किसी के दर्द को अपना समझने की. यही सोच उनकी संस्था को आगे बढ़ा रही है. विशाल बताते हैं कि संस्था को स्वास्थ्य मंत्रालय के वेब पोर्टल पर भी स्थान मिला हुआ है. उनके इन कार्यों को देखते हुए जिला प्रशासन से लेकर कई सामाजिक संगठनों की ओर से उन्हें कई बार सम्मानित किया जा चुका है.

