Tata sons New Chairman: टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के इस्तीफे के बाद कंपनी में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि अगला चेयरमैन कौन होगा। इस पद के लिए दो लोगों के नामों की खासी चर्चा हो रही है। पहला नाम टाटा स्टील के ग्लोबल मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ टीवी नरेंद्रन और दूसरा नाम टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन और रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल टाटा। अगर नोएल टाटा खुद चेयरमैन का पद नहीं लेते हैं, तो इस पद की नियुक्ति पर नोएल की बड़ी भूमिका होने वाली है। चलिए, एक नजर डालते हैं नोएल टाटा किस ओहदे पर हैं जिसकी वजह से इस पद के चुनाव पर उनका वीटो चलेगा।
होगी बड़ी भूमिका
नोएल टाटा ने कई दशकों तक अपने सौतेले भाई रतन टाटा के विपरीत लाइमलाइट से दूर रहकर रिटेल और ट्रेडिंग बिजनेस को आगे बढ़ाया। अब टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन के तौर पर वे टाटा ग्रुप के सामने आने वाले दो सबसे बड़े फैसलों पर असर डालने वाले हैं। ग्रुप की कमान आगे कौन संभालेगा और क्या यह कभी पब्लिक होगी। ट्रस्ट्स को संभालने में नोएल की भूमिका, टाटा संस में उत्तराधिकार की प्रक्रिया पर उनका असर और लिस्टिंग पर चल रही बहस में उनकी भागीदारी, भारत के सबसे मशहूर और बड़े बिजनेस ग्रुप्स में से एक का भविष्य तय कर सकती है। टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस का कुल मार्केट वैल्यू 277 अरब डॉलर है।
टाटा ट्रस्ट का बड़ा असर
फरवरी 2027 में वर्तमान चेयरमैन चंद्रशेखरन का कार्यकाल पूरा होने के बाद टाटा संस को नया चेयरमैन चुनना होगा। टाटा संस में कंट्रोलिंग हिस्सेदारी होने के कारण इस फैसले में टाटा ट्रस्ट्स का बड़ा असर है। 68 साल के नोएल, दशकों तक ग्रुप का चेहरा रहे अपने सौतेले भाई रतन टाटा की छाया में रहे। उन्होंने ग्रुप की मुख्य कंपनियों के बजाय रिटेल और ट्रेडिंग जैसे कम चर्चित क्षेत्रों में काम करते हुए अपनी पहचान बनाई।
अलग-अलग बोर्ड में किए काम
भले ही नोएल सार्वजनिक रूप से कम ही नजर आते थे, लेकिन उन्होंने कई सालों तक ग्रुप की अलग-अलग कंपनियों के बोर्ड में काम किया। भारत के सबसे जाने-माने कॉर्पोरेट लीडर्स में से एक रतन टाटा के उलट, नोएल ने ग्रुप में अपना असर बढ़ने के बावजूद ज्यादातर पब्लिसिटी से दूरी बनाए रखी। अक्टूबर 2024 में रतन टाटा के निधन के बाद ही वे एक अहम व्यक्ति के तौर पर सामने आए।
बेहद ताकतवर पद पर काबिज
ट्रस्टीज ने सर्वसम्मति से उन्हें टाटा ट्रस्ट्स का चेयरमैन नियुक्त किया और इसके बाद वे नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए। अब वे भारतीय कॉर्पोरेट गवर्नेंस में सबसे ताकतवर पदों में से एक पर हैं।
नए चेयरमैन की नियुक्ति पर असर
ट्रस्ट्स को संभालने में नोएल की भूमिका, टाटा संस में उत्तराधिकार की प्रक्रिया पर उनका असर और लिस्टिंग पर चल रही बहस में उनकी भूमिका भारत के सबसे बड़े और जाने-माने बिजनेस ग्रुप्स में से एक के भविष्य को आकार दे सकती है। इस महीने एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “काम यह है कि हमारे पास मौजूद रिसोर्सेज का सबसे असरदार तरीके से बंटवारा किया जाए, यह तय किया जाए कि उन रिसोर्सेज का सही इस्तेमाल कैसे हो और भारत के लिए जो सबसे अच्छा हो, वह किया जाए।” उन्होंने कहा, “हमें उस मकसद को पूरा करना है जिसके लिए ट्रस्ट्स के फाउंडर्स ने अपने शेयर्स छोड़े थे-भारत में लोगों का जीवन बेहतर बनाना।”
उत्तराधिकार और लिस्टिंग पर बहस
158 साल पुराने इस ग्रुप के भविष्य को दो मुद्दे तय करेंगे, पहला टाटा संस के अगले चेयरमैन का चुनाव और दूसरा, क्या प्राइवेट कंपनी को कभी पब्लिक लिस्टिंग के लिए जाना चाहिए।

