भारत का विदेशी मुद्रा भंडार सात अगस्त को चार महीने के उच्च स्तर 707 अरब डॉलर पर पहुंच गया। देश के भुगतान संतुलन को मजबूती देने के लिए किए गए नीतिगत उपायों से यह बढ़ोतरी हुई है। पिछले छह हफ्तों में केंद्रीय बैंक का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा है। इसमें लगभग 40 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है।
जनवरी के बाद सबसे उच्च स्तर पर
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार में हफ्ता दर हफ्ता आधार पर 14.1 अरब डॉलर का उछाल दर्ज किया गया, जिसके बाद यह जनवरी के बाद सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गया। यह बढ़ोतरी केंद्रीय बैंक के विदेशी मुद्रा संपत्तियों में 9.9 अरब डॉलर की वजह से हुई है। पिछले छह हफ्तों में केंद्रीय बैंक का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा है। इसमें लगभग 40 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है।
सरकारी उपायों से मिला फायदा
देश में डॉलर के इनफ्लो को बढ़ाने के लिए, जून में जिन उपायों की घोषणा की गई उनमें सरकारी कंपनियों और बैंकों के लिए विदेशी कर्ज पर रियायती हेजिंग सुविधाएं, सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेश पर टैक्स में कटौती और बैंकों के लिए विदेशी मुद्रा जमा जुटाने के लिए मुफ्त हेजिंग की सुविधा शामिल है।
स्वैप सुविधाओं से आया निवेश
8 जून से 31 जुलाई के बीच, स्वैप सुविधाओं के जरिए 40 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश आया, जबकि विदेशी निवेशकों ने ‘पूरी तरह से सुलभ रूट’ के तहत 2.5 अरब डॉलर से ज्यादा मूल्य के भारतीय सरकारी बॉन्ड खरीदे।
रुपये को बचाने के लिए उपाय
विदेशी मुद्रा संपत्तियों में होने वाले बदलाव में, रिजर्व में रखी दूसरी मुद्राओं के मूल्य में बढ़ोतरी या कमी के असर को भी शामिल किया जाता है। जानकारों का कहना है कि रुपये को बचाने के लिए हाल ही में केंद्रीय बैंक के दखल से शायद विदेशों से आने वाले डॉलर के कुछ असर को बेअसर कर दिया गया है। विदेशी मुद्रा भंडार में, इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) में भारत की रिजर्व ट्रेंच पोजिशन भी शामिल है।

