नई दिल्ली. पूरी दुनिया के फुटबॉल प्रेमियों को जिस बात का डर था वही हुआ. अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर लियोनेल मेसी अब अपनी टीम की तरफ से कभी इंटरनेशनल मैच खेलते नजर नहीं आएंगे. जिसने नन्हें नन्हें पैरों को गोल से गेंद से ड्रिबल करना सिखाया…जिसने बॉल को पैरों पर नचाने का हुनर दिया और जिसने एक 14 साल के बच्चे को दुनिया का सबसे महान फुटबॉलर बनाने का सपना देखा उनके जाने का गम लियो संभाल नहीं पाए. जॉर्ज मेसी से निधन ने नंबर 10 की जर्सी पहनकर मैदान पर करिश्मा करने वाले जादूगर के कदमों को थाम दिया. ये दर्द इतना गहरा था कि उन्होंने ऐसा मुश्किल फैसले ले लिया जिसके बारे में सोचने में भी उस शख्स को डर लगता था.
24 जून 1987 को जॉर्ज मेसी के घर एक ऐसे बच्चे का जन्म हुआ जिसे आज पूरी दुनिया लियोनेल मेसी के नाम से जानती है. महज 4 साल की उम्र से फुटबॉल को नचाने वाले इस खिलाड़ी को उनके पिता ने तब बॉल और पैर कलाकारी सिखाई जब लोग ठीक से भागना सीख रहे होते हैं. पिता जॉर्ज ने बेटे में अपने सपने को जीना शुरु किया. रोसारियो में जन्मे मेसी ने बहुत छोटी उम्र में फुटबॉल के प्रति अपना जुनून दिखाना शुरू कर दिया था. उनके पिता जॉर्ज ने इस प्रतिभा को पहचाना और उन्हें स्थानीय क्लब ग्रांदोलो में फुटबॉल खेलने के लिए ले गए. जॉर्ज खुद भी फुटबॉल से जुड़े रहे थे और उन्होंने बेटे के खेल को निखारने में लगातार मदद की.
जॉर्ज मेसी ही दुनिया का महानतम फुटबॉल में शुमार लियोनेल मेसी के पहले कोच थे. जब वो इस खेल के बारे में अच्छे से जानते भी नहीं थे तब उनको क्लब ग्रांदोलो लेकर जाते थे. यहीं उनके इस खेल की बारीकियों को सीखने की शुरुआत हुई. बतौर कोच उनके पिता ने शुरुआती ट्रेनिंग दी. जब वो सिर्फ 8 साल के हुए तो पिता ने सपनों की पहली उड़ान भरने की सोच दी. बेटे को लेकर न्यूवेल्स ओल्ड बॉयज का रुख किया. यहीं से शुरू हुआ लियो के लियोनेल मेसी बनने का सफर.
जब मेसी फुटबॉल की दुनिया में कदम रख रहे थे तभी परिवार के सामने एक बड़ी चुनौती उनकी तबीयत को लेकर आई. मेसी की लंबाई और शारीरिक डेवलपमेंट ने खेल पर विराम लगा दिया. बेहतर इलाज के लिए महंगे ग्रोथ हार्मोन की जरूरत थी. पिता ने बेटे का सपना ना टूटे इसके लिए माली हालात ठीक ना होने के बाद भी जी जान लगा दिया. इलाज का खर्च उठाने के लिए मेहनत की. बेटे को स्पेन के सबसे प्रतिष्ठित क्लब बार्सिलोना तक पहुंचाने के लिए ला मासिया अकादमी में शामिल कराया. यह फैसला एक पिता के लिए आसान नहीं था क्योंकि छोटे से बच्चे को हजारों किलोमीटर दूर ले जाना मुश्किल था. बार्सिलोना ने मेसी ने धीरे-धीरे दुनिया में पहचान दिलाई. उनकी प्रतिभा से सबको वाकिफ कराया. युवा टीम से लेकर सीनियर टीम तक उनका सफर काफी जल्दी तय कर लिया.
7 अगस्त को कैंसर से जूझ रहे जॉर्ज मेसी ने 68 साल की उम्र में आखिरी सांस ली. उनकी मौत की खबर ने बेटे मेसी को बुरी तरह से तोड़ दिया. 31 अगस्त को इस महान फुटबॉल ने इंटरनेशनल फुटबॉल को अलविदा कह दिया.

