सुप्रीम कोर्ट ने पैकेज्ड फूड पर लेबलिंग को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) को पैकेज्ड फूड पर फ्रंट-ऑफ-पैकेज वॉर्निंग लेबल लगाने के लिए एक साफ और वैज्ञानिक रूप से सही समय-सीमा बताने के लिए 10 दिन का समय दिया है। इससे FSSAI पर प्रस्तावित सिस्टम को लागू करने का दबाव बढ़ गया है।
कोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और के. विनोद चंद्रन की बेंच ने गुरुवार को शुगर, सैचुरेटेड फैट और नमक की ज्यादा मात्रा की जानकारी देने वाले प्रस्तावित लेबल के बारे में स्पष्टीकरण मांगा। साथ ही, कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी बताने को कहा कि वह स्कूली बच्चों में पोषण से जुड़ी जानकारी को बेहतर बनाने के लिए क्या योजना बना रही है।
FoPL पर याचिका की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट ‘3S एंड आवर हेल्थ सोसाइटी’ की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें पैकेज्ड फूड पर फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग (FoPL) को अनिवार्य करने की मांग की गई है।
दो चरणों वाली व्यवस्था का प्रस्ताव
FSSAI ने दो चरणों वाली एक व्यवस्था का प्रस्ताव दिया था, जिसके तहत शुरुआत में दो या उससे ज्यादा खास पोषक तत्वों की ज्यादा मात्रा वाले प्रॉडक्ट्स और खास मीठे ड्रिंक्स पर साफ तौर पर दिखने वाले लाल चेतावनी लेबल लगाए जाएंगे। दूसरे चरण में, चेतावनी लेबल उन प्रोडक्ट्स पर भी लगाए जाएंगे जिनमें इनमें से कोई भी एक पोषक तत्व ज्यादा मात्रा में होगा।
समय-सीमा न होने पर सवाल
नियामक ने कहा है कि चरण-दर-चरण तरीके से लागू करने से ‘ग्राहक इसे अपना सकेंगे’ और ‘इंडस्ट्री को फॉर्मूला बदलने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा।’ हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने दोनों चरणों के बीच बदलाव के लिए कोई साफ समय-सीमा तय न होने पर सवाल उठाए। गुरुवार देर रात जारी एक आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ”हमें डर है कि अगर कोई साफ संकेत नहीं दिया गया, तो दूसरे चरण को लागू करने में देरी हो सकती है या इसे अनिश्चित काल के लिए टाला जा सकता है।”

