
CMO Staffer Booked Over Jamui Case: बिहार के जमुई में नाबालिग लड़की से छेड़छाड़ और बदसलूकी के मामले में पीड़िता की पहचान सार्वजनिक होने को लेकर अब कार्रवाई हुई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल X पर पीड़िता और उसके परिवार की तस्वीर पोस्ट किए जाने के मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात कर्मचारी सागर प्रसाद के खिलाफ पटना के सचिवालय थाने में FIR दर्ज की गई है। तस्वीर को सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाने के बाद वह अन्य प्लेटफॉर्म पर भी प्रसारित हुई। मामले में पुलिस ने तस्वीर पोस्ट करने और उसे आगे शेयर करने वालों की भी जांच शुरू कर दी है।
CMO कर्मचारी पर क्या आरोप है?
सचिवालय थाने में दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री कार्यालय के आशुलिपिक सागर प्रसाद ने जमुई की नाबालिग पीड़िता और उसके परिजनों की तस्वीर X पर पोस्ट की थी। यह तस्वीर उस समय सामने आई, जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात की थी। मुख्यमंत्री के आधिकारिक हैंडल से पोस्ट की गई तस्वीर को बाद में हटा दिया गया।तस्वीर सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने नाबालिग की पहचान सार्वजनिक होने को लेकर सवाल उठाए। अब सचिवालय थाने में POCSO एक्ट समेत कई धाराओं में केस दर्ज कर लिया है।
An FIR has been registered at the Secretariat Police Station against an employee of the Chief Minister’s Office regarding the posting of a photograph of the Jamui victim’s family on Chief Minister Samrat Choudhary’s social media handle (‘X’) yesterday. https://t.co/PZ9VW6tt0U
— ANI (@ANI) September 25, 2026
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ फोटो
जमुई मामले में पुलिस पहले से ही सोशल मीडिया पर वायरल हुए उस वीडियो के प्रसार के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, जिसमें नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर होने की बात सामने आई थी। जमुई पुलिस ने बताया था कि ऐसे करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल चिन्हित किए गए हैं और उनके खिलाफ साइबर थाने में मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने लोगों से वीडियो को आगे शेयर नहीं करने की अपील भी की थी। तस्वीर को लेकर विपक्षी नेता तेजस्वी यादव और मीसा भारती ने सवाल उठाए और पीड़िता की पहचान की सुरक्षा का मुद्दा उठाया।
अब आगे क्या कार्रवाई होने की संभावना?
सचिवालय थाना पुलिस अब यह जांच कर रही है कि तस्वीर किसके माध्यम से X पर अपलोड की गई, इसे किन लोगों ने आगे साझा किया और नाबालिग की पहचान सार्वजनिक होने की परिस्थितियां क्या थीं। मामले में डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि FIR में नामजद कर्मचारी और अन्य संभावित आरोपियों की क्या भूमिका थी।
