नई दिल्ली (Babita Mam Parimal Sir Love Story). हरियाणा के जाने-माने ICS कोचिंग सेंटर के फाउंडर और चहेते शिक्षक परिमल सर और बबीता मैम की जोड़ी किसी पहचान की मोहताज नहीं है. पढ़ाने के अपने बेबाक अंदाज और मोटिवेशनल स्वभाव के कारण लाखों दिलों पर राज करने वाले इन दोनों शिक्षकों ने अपनी शादी की 21वीं सालगिरह पर बेहद खूबसूरत सरप्राइज दिया. सोशल मीडिया पर कई पार्ट्स में रिलीज हो रही इस लव स्टोरी में आम स्टूडेंट्स से जीवनसाथी बनने तक का सफर बयां किया गया है.
परिमल सर और बबीता मैम की लव स्टोरी
देश में कई कोचिंग टीचर्स बहुत मशहूर हैं. इनका अपने स्टूडेंट्स के साथ पर्सनल कनेक्शन बन गया है. कुछ यही हाल सोनीपत (हरियाणा) के परिमल सर और बबीता मैम का भी है. बच्चे इनके साथ जुड़ाव महसूस करते हैं. शायद इसीलिए इन दोनों ने इतनी सहजता के साथ दुनिया के सामने अपनी लव स्टोरी शेयर की है.
पार्ट 1: कोचिंग की बेंच से शुरू हुई दास्तां
हर प्रेम कहानी की तरह इसकी शुरुआत भी बहुत साधारण थी. लेकिन इसका क्लाइमैक्स फिल्मी था. परिमल सर और बबीता मैम की शादी की 21वीं सालगिरह पर स्टूडेंट्स ने बबीता मैम से पूछा कि उनके प्यार की शुरुआत कैसे हुई थी तो मैम शरमा गईं. उन्होंने बताया कि उन्हें अब तारीखें ठीक से याद नहीं हैं. तभी परिमल सर ने रोमांटिक अंदाज में कहा- मैम को भले ही याद न हो, लेकिन मुझे हर बात तारीख के साथ याद है.
परिमल सर बताते हैं कि वे कोचिंग में बबीता मैम को मैथ्स पढ़ाया करते थे और मैम उन्हें इतिहास की तैयारी करवाती थीं. एक दिन परिमल सर अपने दिल की बात बबीता मैम को बताना चाहते थे, लेकिन उस दिन मैम ने कोचिंग से छुट्टी ले ली. परिमल सर ने तुरंत फोन घुमाया और कहा- शाम की हरियाणा रोडवेज की बस पकड़ो और तुरंत कोचिंग पहुंचो, जरूरी बात करनी है. हालांकि, उस दिन मैम नहीं आईं.
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पार्ट 2: फरवरी में इजहार और सितंबर 2005 में शादी
इनकी प्रेम कहानी साल 2005 में शुरू हुई थी. प्यार और रिश्तों की गाड़ी को आगे बढ़ाने के दौरान बबीता मैम और परिमल सर ने कभी अपनी जिम्मेदारियों या सीमाओं को नहीं लांघा. बबीता मैम बताती हैं कि परिमल सर उनकी जिंदगी में आने वाले पहले और आखिरी शख्स थे. उन्होंने कभी इसे किसी ‘टाइमपास’ की तरह नहीं लिया.
मैम के शब्दों में- परिमल सर हर मर्यादा और पारिवारिक सीमाएं समझते थे. वे कभी कोई ऐसा कदम नहीं उठाना चाहते थे जिससे मेरे माता-पिता को शर्मिंदा होना पड़े या मुझे कभी पछतावा हो. यह फरवरी 2005 के आखिरी दिनों की बात है. फिर मार्च-अप्रैल में दोनों की परीक्षाएं हुईं. दोनों ने अपनी पढ़ाई पूरी ईमानदारी से की, परीक्षा पास की और सितंबर 2005 में परिवार की रजामंदी से हमेशा के लिए एक-दूसरे के हो गए.
पार्ट 3: पार्लियामेंट हाउस में हुई थी शादी की बात, सादगी देख हैरान रह गए थे पिता
उस दिन परिमल सर जो गेटअप लेकर पहुंचे, उसे याद करके आज भी हंसी छूट जाती है. परिमल सर टी-शर्ट, पायजामा और घिसी हुई हवाई चप्पल पहनकर पार्लियामेंट हाउस पहुंच गए थे. उनके कपड़ों का रंग भी थोड़ा उड़ा हुआ था. बबीता मैम के पिता ने पहले से ही उनकी शादी के लिए किसी दूसरे मैथ्स टीचर को भी देख रखा था. अगर परिमल सर उस इम्तिहान में फेल हो जाते तो रिश्ता किसी और से तय हो जाता.
पार्लियामेंट हाउस के प्रांगण में बबीता मैम के पिता ने परिमल सर का इंटरव्यू लिया. पिता और दादा के नाम से लेकर जमीन-जायदाद और फैमिली बैकग्राउंड तक की डिटेल डायरी में नोट की गई. परिमल सर ने बताया कि उनके पिता इस दुनिया में नहीं हैं और उनका परिवार गांव में रहता है. बबीता मैम के पिता ने कहा कि वे अपने बेटों और बबीता की मां से विचार करके अंतिम फैसला बताएंगे.
घर पर चर्चा हुई तो दोनों की ईमानदारी, सादगी और एक-दूसरे के प्रति निष्ठा को देखते हुए परिवार वाले मान गए. इस तरह यह खूबसूरत प्रेम कहानी हमेशा के लिए सफल वैवाहिक बंधन में बदल गई.

