नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और पूर्व मुख्य चयनकर्ता अजित अगरकर के बीच रिश्तों में आई खटास इस वक्त जगजाहिर हो चुकी है. रिपोर्ट में ऐसा दावा किया जा रहा है कि इंग्लैंड के दौरे पर रोहित शर्मा को वनडे टीम से बाहर करने पर दोनों के बीच असहमति से सारा विवाद खड़ा हुआ. अब खबर है कि अगरकर का कार्यकाल बतौर मुख्य चयनकर्ता 4 अक्तूबर के बाद आगे नहीं बढ़ाया जाएगा. उन्होंने खुद बीसीसीआई को इसकी जानकारी दे दी थी.
मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर अब आगे अपने कार्यकाल को बढ़ाना नहीं चाहते. इसकी जानकारी उन्होंने फरवरी में ही बीसीसीआई को दे दी थी. उसको लेकर एक रिपोर्ट में बड़ा दावा किया गया है. खबर ये भी है कि जिस तरह से पूर्व कप्तान रोहित शर्मा का बीसीसीआई ने बचाव किया और उनको टीम में बनाए रखने का समर्थन किया उससे अगरकर नाराज थे. PTI की रिपोर्ट के मुताबिक रोहित शर्मा के वनडे भविष्य को लेकर हुआ विवाद दोनों पक्षों के बीच मतभेद की बड़ी वजह बना था. रिपोर्ट में किए गए इन दावों की द भारत ख़बर पुष्टि नहीं करता है.
रिपोर्ट की माने तो इंग्लैंड दौरे पर ही बीसीसीआई और अगरकर के बीच सारी चीजें बिगड़ी थी. तीन मैचों की वनडे सीरीज से पहले अगरकर रोहित शर्मा को वनडे टीम से बाहर करना चाहते थे. टीम मैनेजमेंट और कुछ BCCI अधिकारियों के समर्थन से उनको भविष्य की योजना से बाहर करने पर विराच कर लिया था. चयनकर्ताओं ने 2027 वनडे विश्व कप को ध्यान में रखते हुए रोहित की जगह यशस्वी जायसवाल को मौका देने का मन बना लिया था. रिपोर्ट में कहा गया कि चयनकर्ता जायसवाल को करीब 20 वनडे मैचों का रन देना चाहते थे.

ऐसा बताया जा रहा है कि साउथ जोन के चयनकर्ता प्रज्ञान ओझा को रोहित तक इस फैसले को पहुंचाना था. रोहित को इस तरीके से उनको लेकर फैसले लिया जाना सही नहीं लगा. खासकर जिस तरीके से इस मामले को हैंडल किया गया वो कथित तौर पर खुश नहीं थे. लॉर्ड्स में खेले जाने वाले आखिरी वनडे से पहले रोहित शर्मा के इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास की खबरें मीडिया में आई. इसके बाद मामला इतना ज्यादा बढ़ गया कि BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने मैच से पहले बयान देकर रोहित के भविष्य पर स्थिति स्पष्ट की थी.
सैकिया ने कहा था कि रोहित वनडे टीम के सदस्य हैं और लॉर्ड्स का मुकाबला उनका आखिरी मैच नहीं होगा. रोहित शर्मा ने लॉर्ड्स में धमाकेदार शतकीय पारी खेल डाली और उनके संन्यास को लेकर चल रहे विवाद ने जोर पकड़ लिया. इसके बाद अगरकर को समझ आ गया कि वो बीसीसीआई के समर्थन के बाद रोहित जैसे बड़े खिलाड़ियों पर फैसला नहीं ले पाएंगे.

