अरुणाचल प्रदेश में पीएलए ने बनाए स्थाई कैंप, भारतीय नागरिकों को उनकी जमीनों में जाने से रोका
Arunachal Pradesh Infiltration (द भारत ख़बर), नई दिल्ली : भारत और चीन के बीच सीमा विवाद काफी पुराना और जटिल है। समय-समय पर चीनी सेना पर आरोप लगते आए हैं कि वह भारतीय सीमा में घुसपैठ करने की कोशिश करती है। चीन सेना द्वारा घुसपैठ का मुद्दा कई बार संसद में भी गूंज चुका है।
अब एक बार फिर से यह बताया जा रहा है कि चीनी सेना ने अरुणाचल प्रदेश के सुबनसिरी जिले में घुसपैठ करते हुए अपने स्थाई कैंप बना लिए हैं। इस संबंध में जानकारी तब मिली जब सुबनसिरी के अधिवासी समुदाय के लोगों को उनकी पुश्तैनी जमीनों में खेती करने से पिछले दिनों चीन के सैनिकों ने रोक दिया और उन्हें वापस जाने को बोला।
आदिवासी समुदाय ने डीसी को सौंपा ज्ञापन
हाल ही में अपर सुबनसिरी के डिप्टी कमिश्नर को सौंपे गए ज्ञापन में नाह वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष केरू चाडर ने कहा, ‘हमारी पुश्तैनी जमीनें जहां हम कुछ वर्ष पहले तक शिकार करते थे, जंगल से उपज इकट्ठा करते थे और अपने मवेशियों को चराते थे अब चीनी सेना के कब्जे में हैं। उन्होंने पांच स्थानों पर चीन की गतिविधियों का आरोप लगाया है। संगठन के अनुसार ये सभी क्षेत्र अपर सुबनसिरी जिले के टक्सिंग रेवेन्यू सर्कल के अंतर्गत आते हैं। उनका कहना है कि चीनी सरकार रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इलाकों पर कब्जा कर अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ अपने नियंत्रण का लगातार विस्तार कर रही है।
पिछले कुछ साल से लगातार बढ़ रही चीनी सेना की गतिविधियां
घुसपैठ के संबंध में समुदाय ने आरोप लगाया कि पिछले 10 से 15 वर्षों के दौरान टक्सिंग सीमा क्षेत्र में चीन की गतिविधिया लगातार बढ़ी हैं। संगठन का दावा है कि इसका उद्देश्य अधिक से अधिक भारतीय भूमि पर कब्जा करना है। आदिवासी संगठन के अनुसार, वर्ष 2020 तक जिन क्षेत्रों पर उनका पारंपरिक नियंत्रण था, उनमें से कई स्थानों पर अब कथित तौर पर पीएलए का कब्जा हो चुका है।
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