Delhi Open Drain Tragedy: दिल्ली के जसोला इलाके में खुले नाले ने एक परिवार से उसका 15 साल का बेटा छीन लिया। शनिवार सुबह पतंग पकड़ने की कोशिश में नाले में गिरे मिथुन की तलाश करीब 75 घंटे तक चली। मंगलवार दोपहर आपदा राहत दलों ने उसका शव घटनास्थल से करीब 500 मीटर दूर शाहीन बाग मेट्रो स्टेशन के नीचे कचरे के ढेर में फंसा हुआ बरामद किया। मिथुन के पिता अवधेश कुमार और मां अनीता देवी तीन दिन तक बारिश और धूप के बीच नाले के किनारे बैठे बेटे के जिंदा मिलने की उम्मीद लगाए रहे। परिवार ने राहत अभियान में देरी और खुले नाले की बदहाल स्थिति को लेकर सवाल उठाए हैं।
पतंग के पीछे गया था मिथुन
मिथुन जसोला गांव की एक तंग गली में परिवार के साथ किराए के एक कमरे में रहता था। वह नगर निगम के स्कूल में कक्षा 8 में पढ़ता था। शनिवार सुबह करीब 11 बजे वह पतंग लेने के प्रयास में खुले नाले में गिर गया। पांच साल के एक बच्चे ने मिथुन को नाले में गिरते देखा और आसपास के लोगों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद पड़ोसियों ने उसके माता-पिता को सूचना दी। दोनों करीब 15 मिनट में मौके पर पहुंचे और पुलिस को घटना की जानकारी दी।
पिता ने हाथों से हटाया कचरा
मिथुन के पिता अवधेश कुमार सीवर सफाई का काम करते हैं। बेटे को खोजने के लिए उन्होंने नाले में जमा कचरे को अपने हाथों से हटाना शुरू कर दिया। उनका कहना था कि वह तैरना नहीं जानते, फिर भी बेटे को बचाने के लिए नाले में उतरने को तैयार थे। उनके रिश्तेदार और पड़ोसी भी नाले में उतरकर तलाश करना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने जोखिम का हवाला देते हुए उन्हें रोक दिया। परिवार और स्थानीय लोगों ने रविवार को राहत कार्य में देरी को लेकर विरोध भी किया।
75 घंटे बाद कचरे में मिला शव
पुलिस के अनुसार नाले में पानी का बहाव तेज होने के कारण मिथुन का पता लगाने में काफी मुश्किलें आईं। नाले में गाद, कचरा और पाइप होने से बचाव अभियान और चुनौतीपूर्ण हो गया था। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीम शनिवार शाम करीब 4 बजे अभियान में शामिल हुई। मंगलवार दोपहर बचाव दलों को मिथुन का शव घटनास्थल से करीब 500 मीटर दूर कचरे में फंसा मिला।
परिवार ने प्रशासन पर उठाए सवाल
मिथुन के परिवार और स्थानीय लोगों ने खुले नालों को लेकर प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। स्थानीय निवासी मोहम्मद रियाज ने कहा कि इलाके में दो नाले हैं, लेकिन दोनों खुले हैं और उनके किनारे पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था या दीवार नहीं है। उनका दावा है कि पहले भी लोग इन नालों में गिरकर जान गंवा चुके हैं। बताया गया कि नाले को लेकर दिल्ली जल बोर्ड और नगर निगम के बीच रखरखाव की जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। बाद में अधिकारियों ने बताया कि नाले का रखरखाव नगर निगम को सौंपा जा चुका है।
कंप्यूटर इंजीनियर बनना चाहता था मिथुन
मिथुन के माता-पिता के अनुसार उनका बेटा पढ़ाई में रुचि रखता था और बड़ा होकर कंप्यूटर साइंस इंजीनियर बनना चाहता था। वह चित्र बनाने और पेंटिंग में भी अच्छा था। परिवार ने उसके सपने को पूरा करने के लिए उसका कंप्यूटर कोचिंग सेंटर में दाखिला कराया था। अनीता देवी ने बताया कि हादसे से एक रात पहले मिथुन उनके लिए चिप्स के दो पैकेट लेकर आया था और उनमें से एक पैकेट खाने के लिए उन्हें मनाया था। बेटे की ऐसी यादें अब परिवार के लिए सबसे बड़ा सहारा बन गई हैं।
दिल्ली में खुले नालों से हादसों पर चिंता
मिथुन की मौत दिल्ली में खुले नालों और जलभराव वाले असुरक्षित स्थानों से जुड़े हादसों की कड़ी में एक और घटना है। परिवार का कहना है कि मुआवजे से ज्यादा जरूरी यह है कि खुले नालों को सुरक्षित बनाया जाए, ताकि किसी दूसरे परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े। मिथुन का पोस्टमार्टम एम्स के शवगृह में किया जाना है। इसके बाद बुधवार को अंतिम संस्कार किए जाने की संभावना है।

