
Swine Flu Prevention Tips: दिल्ली-एनसीआर में इस वक्त स्वाइन फ्लू तेजी से फैल रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार राजधानी में स्वाइन फ्लू के 2000 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। इसके अलावा फ्लू और अन्य वायरल बीमारियों का कहर भी बढ़ रहा है। फ्लू और सांस से जुड़ी बीमारियों को लेकर लोगों की चिंता बढ़ रही है। स्वाइन फ्लू से बचने के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) ने गाइडलाइंस जारी की हैं। इसमें बताया गया है कि स्वाइन फ्लू के संक्रमण से बचने के लिए लोगों को क्या-क्या सावधानी बरतनी चाहिए, मास्क कब पहनना चाहिए और किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर समस्या गंभीर हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
स्वाइन फ्लू क्या है और क्या लक्षण हैं?
स्वाइन फ्लू H1N1 वायरस से होने वाला एक रेस्पिरेटरी इंफेक्शन है। यह कोई नया वायरस नहीं है, लेकिन मौसमी इन्फ्लुएंजा के एक वायरस के रूप में देखा जाता है। WHO के अनुसार इन्फ्लुएंजा एक संक्रामक श्वसन बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैल सकती है। इसके सामान्य लक्षणों में अचानक बुखार, शरीर में दर्द, सिरदर्द, कमजोरी, सूखी खांसी और गले में खराश शामिल हो सकते हैं। ज्यादातर लोगों में फ्लू हल्का रहता है और घर पर आराम, पर्याप्त तरल पदार्थ और इलाज से ठीक हो सकता है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से कुछ बीमारियों से जूझ रहे लोगों में गंभीर बीमारी और जटिलताओं का खतरा अधिक हो सकता है। ऐसे लोगों को इससे बचने के लिए ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए।
क्या H1N1 से बचने के लिए मास्क पहनें?
ICMR और NCDC की गाइडलाइंस के अनुसार स्वाइन फ्लू से बचने के लिए घर से बाहर जाते वक्त मास्क पहनना चाहिए। अगर आपको फ्लू है, आपके आसपास किसी को फ्लू है या आप भीड़भाड़ वाली जगह पर जा रहे हैं, तब आपको मास्क जरूर पहनना चाहिए। अस्पताल और संक्रमित मरीजों की देखभाल करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के लिए हाई-एफिशिएंसी मास्क और अन्य PPE का इस्तेमाल किया जाता है। WHO भी बताता है कि इन्फ्लुएंजा सांस की बूंदों के जरिए फैल सकता है। इसलिए खांसी-जुकाम या फ्लू के लक्षण होने पर दूसरों से दूरी रखना, खांसते-छींकते समय मुंह ढंकना और हाथों की सफाई रखना संक्रमण फैलने का जोखिम कम करने में मदद करता है। बीमारी के दौरान जहां संभव हो, घर पर रहना चाहिए और अन्य लोगों से दूरी बरतनी चाहिए।
H1N1 से बचने के आसान तरीके
हाथों को साबुन और पानी से नियमित रूप से धोएं।
खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिश्यू से ढकें।
इस्तेमाल किए गए टिश्यू को तुरंत कूड़ेदान में डालें।
आंख, नाक और मुंह को बार-बार छूने से बचना चाहिए।
फ्लू जैसे लक्षण होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
बीमार व्यक्ति के बेहद करीब रहने से बचें।
घर और आसपास की बार-बार छुई जाने वाली सतहों की सफाई रखें।
पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ लें।
हाई-रिस्क व्यक्ति डॉक्टर से फ्लू वैक्सीन के बारे में सलाह ले सकते हैं।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?
हर व्यक्ति में फ्लू का असर एक जैसा नहीं होता। छोटे बच्चे, 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और कुछ पुरानी बीमारियों या कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में गंभीर संक्रमण का जोखिम अधिक हो सकता है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार ऐसे लोगों में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर केवल घर पर इंतजार करने के बजाय डॉक्टर से जल्दी सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित है।
कब अस्पताल जाने की जरूरत पड़ सकती है?
हर H1N1 मरीज को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं होती। NCDC के क्लीनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल के अनुसार गंभीर मरीजों की पहचान और समय पर इलाज बेहद महत्वपूर्ण है। गंभीर स्थिति में सांस लेने में परेशानी, ऑक्सीजन की जरूरत, ब्लड प्रेशर में फ्लक्चुएशन या कई अंगों के प्रभावित होने जैसी कंडीशन में अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ती है। अगर फ्लू के दौरान सांस फूलने लगे, सीने में दर्द हो, मरीज बहुत ज्यादा सुस्त या भ्रमित दिखे, लगातार हालत बिगड़ रही हो या ऑक्सीजन स्तर को लेकर चिंता हो, तो तुरंत डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए।
कब H1N1 की जांच करानी चाहिए?
हर फ्लू मरीज का H1N1 टेस्ट जरूरी नहीं होता। NCDC के मौजूदा क्लिनिकल प्रोटोकॉल में पुष्टि के लिए Real-Time RT-PCR जैसे परीक्षणों का उल्लेख है और गंभीर/विशेष श्रेणी के मरीजों में जांच की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होती है। इसलिए केवल बुखार या खांसी होने पर खुद से टेस्ट कराने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर है। डॉक्टर लक्षण, जोखिम और मरीज की स्थिति देखकर तय कर सकते हैं कि जांच की जरूरत है या नहीं।
