Delhi High Court News: दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को रेड बुल (Red Bull) को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कंपनी को अपने प्रोडक्ट पर एनर्जी ड्रिंक (Energy Drink) शब्द का इस्तेमाल बंद करने का निर्देश दिया गया था। जस्टिस अमित महाजन की अदालत ने कहा कि FSSAI ने यह आदेश जारी करने से पहले कंपनी को अपना पक्ष रखने या उचित जवाब दाखिल करने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया। हालांकि कोर्ट ने FSSAI के लिए आगे की कार्रवाई का रास्ता बंद नहीं किया है। अदालत ने साफ किया कि FSSAI आवश्यक प्रक्रिया का पालन करते हुए रेड बुल को सुनने के बाद इस मामले में नया आदेश पारित कर सकता है।
आखिर क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत FSSAI के 30 जून 2026 के आदेश से हुई थी। इस आदेश के जरिए रेड बुल को अपने कैफीनयुक्त पेय पदार्थों के लिए Energy Drink डिस्क्रिप्टर का इस्तेमाल बंद करने को कहा गया था। कंपनी ने इसके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। रेड बुल की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि वह भारत में वर्ष 2002 से अपने उत्पाद के लिए Energy Drink शब्द का इस्तेमाल कर रही है। कंपनी ने यह भी दावा किया कि नियामकीय ढांचे में पहले कैफीनयुक्त पेय पदार्थों की संबंधित श्रेणी के संदर्भ में इस शब्दावली को स्वीकार किया गया था।
हाईकोर्ट ने मामले पर क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत का मुख्य सवाल यह था कि क्या FSSAI कंपनी को पहले नोटिस और सुनवाई का अवसर दिए बिना ऐसा निर्देश जारी कर सकता था। 28 सितंबर की सुनवाई में अदालत ने इसी पहलू पर FSSAI से स्पष्टीकरण मांगा था। इसके बाद 29 सितंबर को कोर्ट ने विवादित आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने माना कि कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना आदेश पारित करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं था। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि FSSAI चाहे तो रेड बुल को कारण बताओ नोटिस जारी करने और उसकी बात सुनने जैसी आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद मामले पर दोबारा फैसला कर सकता है। कोर्ट ने FSSAI के पहले आदेश को प्रक्रिया संबंधी आधार पर रद्द किया है।
FSSAI ने कोर्ट में क्या दलील दी?
सुनवाई के दौरान FSSAI की ओर से अदालत को बताया गया कि अलग से कोई शो-कॉज नोटिस जारी नहीं किया गया था। नियामक का कहना था कि 30 जून का पत्र ही नोटिस के तौर पर माना जा सकता है और उसका मुद्दा उत्पाद पर Energy Drink शब्द के इस्तेमाल तक सीमित था, न कि प्रोडक्ट पर प्रतिबंध लगाने से संबंधित था। वहीं रेड बुल ने कहा था कि आदेश से पहले उसे प्रभावी तरीके से अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं मिला। यह मामला ऐसे समय सामने आया जब FSSAI ने एनर्जी ड्रिंक शब्द के इस्तेमाल को लेकर कई पेय ब्रांडों पर सवाल उठाए थे।

