जनवरी में 63 डॉलर के मुकाबले मार्च में क्रूड आॅयल की कीमत 116 डॉलर प्रति बैरल पहुंची
Oil and Gas Supply (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : अमेरिका और इजरायल द्वारा बीती 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ युद्ध की शुरुआत कर दी थी। इस युद्ध के शुरू होने के बाद विश्व स्तर पर दो बड़े बदलाव देखने को मिले। इनमें एक तो था ईरान द्वारा पश्चिम एशिया के उन देशों पर हमला करना जहां पर अमेरिका के सैन्य कैंप मौजूद थे।
वहीं दूसरा था मार्च के हले सप्ताह में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर देना। ईरान के इन दो कदमों से पूरी दुनिया में जरूरी वस्तुओं की सप्लाई चेन प्रभावित हुई और हर देश में किल्लत महसूस होने लगी। इनमें से गैस और तेल प्रमुख थे। जिसके चलते इन दोनों के दाम ही बढ़ने लगे।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने यह जानकारी की साझा
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने मंगलवार को बताया कि जनवरी में भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत करीब 63 डॉलर प्रति बैरल थी, जो मार्च में बढ़कर 113 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई।
अप्रैल में इसका औसत मूल्य लगभग 116 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया है। हालांकि वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद सरकार ने कहा कि देश में ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। सुजाता शर्मा ने कहा कि भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें पड़ोसी देशों की तुलना में अब भी सबसे कम स्तरों में शामिल हैं।
एलपीजी वितरण और बुकिंग में आई समान्यता
एलपीजी आपूर्ति पर उन्होंने कहा कि घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता सामान्य है और किसी भी वितरक के यहां कमी की शिकायत नहीं मिली है। वर्तमान में गैस सिलेंडर डिलीवरी दक्षता 93 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि आॅनलाइन बुकिंग में कुछ गिरावट आई है और यह फिलहाल 45 से 46 लाख प्रतिदिन के दायरे में है, जबकि कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति लगभग पूरी तरह बहाल हो चुकी है। सरकार ने प्रवासी आबादी को राहत देने के लिए पांच किलो वाले छोटे सिलेंडरों की उपलब्धता भी बढ़ाई है। 3 अप्रैल से अब तक 7,400 जागरूकता शिविर लगाए गए हैं और 1.07 लाख से अधिक छोटे सिलेंडर बेचे जा चुके हैं।

