हालिया हमलों में दो भारतीय नाविकों की मौत के बाद लिया गया फैसला
Iran US War, (द भारत ख़बर), तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी: अमेरिका-ईरान के बीच बढ़े तनाव के बाद डीजीएमए ने जहाज मालिकों को होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय नाविकों को तैनात न करने का निर्देश दिया है। इसके साथ फारस की खाड़ी और आसपास के इलाकों में सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ाने के भी निर्देश दिए गए हैं। यह आदेश जहाज मालिकों, जहाज प्रबंधन कंपनियों और नाविकों की भर्ती करने वाली रिक्रूटमेंट एंड प्लेसमेंट सर्विस लाइसेंस कंपनियों पर लागू होगा।
इंटरनेशनल शिप एंड पोर्ट फैसिलिटी सिक्योरिटी कोड का पालन करने के निर्देश
सरकार ने सभी समुद्री कंपनियों को अरब की खाड़ी, होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के समुद्री इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा गया है कि वे नौवहन संबंधी सभी चेतावनियों और सुरक्षा सलाह पर लगातार नजर रखें और इंटरनेशनल शिप एंड पोर्ट फैसिलिटी सिक्योरिटी कोड का पूरी तरह पालन करें।
अब तक 14 भारतीयों की हो चुकी मौत
सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब इसी हफ्ते होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास हुए ईरानी हमलों में दो भारतीय नाविकों की मौत हो गई। अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद इस समुद्री मार्ग पर हमलों का खतरा बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 फरवरी से अब तक इस क्षेत्र में हुए हमलों में कम से कम 14 भारतीय नाविकों की जान जा चुकी है। हालांकि अगर विदेशी शिपिंग कंपनियां भारत के बाहर से नाविकों की भर्ती करती हैं, तो भारत सरकार का यह आदेश उन पर सीधे लागू नहीं होगा।
दुनिया भर में जहाजों पर 3,00,000 से ज्यादा भारतीय नाविक काम कर रहे
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत दुनिया में समुद्री कर्मचारियों (सीफेयरर्स) का तीसरा सबसे बड़ा सप्लायर है और दुनिया भर में जहाजों पर 3,00,000 से ज्यादा भारतीय नाविक काम कर रहे हैं। यह कदम पिछले तीन दिनों में इस इलाके में जहाजों पर हुए अलग-अलग हमलों में दो भारतीय नाविकों की मौत के बाद उठाया गया है।
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