
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दी ईरान को बड़े हमले की चेतावनी
US Iran War, (द भारत ख़बर), वॉशिंगटन डीसी/ तेहरान/ तेल अवीव: मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच भड़का युद्ध अब नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। फारस की खाड़ी तक सीमित यह जंग अब भूमध्य सागर और मिस्र के प्रमुख ऊर्जा केंद्रों तक फैलती दिख रही है। बुधवार को मिस्र के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण डामिएत्ता पोर्ट पर खड़े एक अमेरिकी गैस टैंकर पर ड्रोन से हमला किया गया, जिसके बाद वहां भीषण विस्फोट हुआ और आग लग गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक ड्रोन ने अमेरिकी कंपनी के नैचुरल गैस स्टोरेज टैंकर एनरगोस विंटर को निशाना बनाया, जिसके बाद आग पास में खड़े दूसरे टैंकर गैसलॉग सलेम तक फैल गई।
हालांकि, दमकल टीम ने जल्द ही आग पर काबू पा लिया और कोई हताहत नहीं हुआ। इस हमले के पीछे ईरान का हाथ बताया जा रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने दो ईरानी सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि हमले का मकसद यह मैसेज देना था कि अगर जंग और बढ़ी तो दुनिया की समुद्री शिपिंग और एनर्जी सप्लाई भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अगर हालात बिगड़े तो अमेरिका ईरान पर बहुत जोरदार हमला करेगा। हालांकि, उन्होंने भविष्य में समझौते की संभावना से भी इनकार नहीं किया।
मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी सैनिकों के फोन जब्त हो सकते हैं
उधर, अमेरिका को आशंका है कि सैनिकों के सोशल मीडिया वीडियो देखकर ईरान यह पता लगा रहा है कि उसके मिसाइल और ड्रोन हमले कितने असरदार रहे और कहां कितना नुकसान हुआ। इसलिए एडमिरल ब्रैड कूपर ने सैनिकों को सैन्य गोपनीयता के नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा है। वहीं, मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी सैनिकों के मोबाइल फोन जल्द जब्त किए जा सकते हैं।
ईरान जंग से दूर रहना चाहते हैं अरब देश
ईरान-इजराइल जंग के बीच अरब देश खुद को इस संघर्ष से दूर रखना चाहते हैं। मिडिल ईस्ट मामलों के जानकार फेलो जैदोन अलकिनानी ने अल जजीरा से बातचीत में कहा कि इस संघर्ष के सबसे करीब मौजूद सभी अरब देशों का एक ही मकसद है- किसी भी हाल में सीधे टकराव का हिस्सा बनने से बचना।
इराक, कुवैत, कतर और बहरीन जैसे देशों पर हमला कर चुका ईरान
उनके मुताबिक ईरान और इजराइल दोनों चाहते हैं कि जंग का दायरा बढ़े और दूसरे देश भी इसमें किसी न किसी तरीके से शामिल हों। अलकिनानी के मुताबिक ईरान चाहता है कि अरब देशों को महसूस हो कि उनकी सुरक्षा भी इस जंग से जुड़ी हुई है। अगर मौजूदा संघर्ष की बात करें, तो ईरान पहले ही इराक, कुवैत, कतर और बहरीन जैसे देशों में हमले कर चुका है। वहीं, सऊदी अरब ने इसी हफ्ते इराक में मौजूद ईरान समर्थक लड़ाकों के ठिकानों पर हमले किए हैं।
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