फरीदाबादः कहते हैं जब बात हक की हो तो इंसान दिन-रात एक कर देता है. फरीदाबाद के सोतई गांव में जमीन के मुआवजे को लेकर चल रहा किसानों का धरना भी अब कुछ अलग ही रंग में नजर आ रहा है. 32वें दिन धरना स्थल पर महिलाएं भजन-कीर्तन करती दिखाई दीं. महिलाएं भगवान से अधिकारियों और नेताओं को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना कर रही हैं. ग्राम सोतई में धरना शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है. किसानों का कहना है कि उनकी लड़ाई लगातार 24 घंटे जारी है और नौकरी या दूसरे काम से लौटने वाले लोग भी धरना स्थल पर पहुंचकर बैठ जाते हैं.
किसानों को उम्मीद है कि 23 सितंबर को पीएमओ में होने वाली समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फरीदाबाद के अधिकारियों से धरने का कारण जानकर उसका समाधान करवाएंगे. हालांकि किसानों को यह शक भी है कि कहीं उनके मामले को लेकर कोई गलत या मनगढ़ंत रिपोर्ट पेश न कर दी जाए. इसलिए किसानों का कहना है कि ऐसी बैठक में उन्हें भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि वे खुद अपना पक्ष अधिकारियों के सामने रख सकें.
नहीं मिला जमीन का पैसा, धरने पर बैठे स्थानीय
लोकल18 से बातचीत में सोतई गांव की निवासी विद्या बताती हैं कि हम जमीन के लिए बैठे हैं. जमीन का पैसा हमें अभी तक नहीं मिला है. हम भजन-कीर्तन भी कर रहे हैं और भगवान से इनको सद्बुद्धि देने की प्रार्थना कर रहे हैं. 24 घंटे हम लोग यहीं धरने पर बैठे रहते हैं. विमला देवी बताती हैं कि हम लोग अपनी हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, इसलिए धरने पर बैठे हैं. हमें अपना पैसा चाहिए, तभी हम अपनी धरती देंगे. जब तक हमें पैसा नहीं मिलेगा, हम लोग यहां से नहीं जाएंगे.
किसान नेता बबलू हुड्डा बताते हैं कि हमारी माता-बहनें यहां पर कीर्तन कर रही हैं. कीर्तन का मुख्य कारण यह है कि जो भ्रष्ट अधिकारी और भ्रष्ट नेता हैं, उनके लिए मां भगवती और भोले बाबा से गीतों के माध्यम से सद्बुद्धि मांगी जा रही है. भारत में कोई और हमारी तरह इस पीड़ा में धरना न दे. आगे भविष्य में किसी और के साथ ऐसा न हो, यही हमारी प्रार्थना है. बबलू हुड्डा बताते हैं कि करीब 15 दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए समीक्षा बैठक ली थी. अब 23 सितंबर को फरीदाबाद के सभी अधिकारियों को पीएमओ में तलब किया गया है. वहां उनसे आमने-सामने बैठकर सवाल-जवाब किए जाएंगे. उनसे पूछा जाएगा कि सोतई गांव की भूमि को विवादित बताने के लिए उनके पास क्या दस्तावेज हैं. हमें उम्मीद है कि वहां सच और झूठ का पर्दाफाश होगा.
नौकरी के बाद आकर देते हैं धरना
स्थानीय निवासी राजकुमार बताते हैं कि हम लोग अपनी हक की लड़ाई लड़ रहे हैं और धरने पर बैठे हैं. हमें हमारे हक के पैसे दे दिए जाएं. मैं नौकरी करता हूं. 8 घंटे नौकरी करने के बाद जब आता हूं तो फिर धरने पर बैठ जाता हूं. मुकेश कुमार बताते हैं कि मेरा गांव महमदपुर है, जो सोतई गांव से करीब 5 किलोमीटर दूर है. हमारे गांव से भी यही रोड निकला है. जेवर एयरपोर्ट वाला यह रास्ता हमारे गांव से होकर ही गया है. मेरे घर की अकेली जमीन भी इस परियोजना में गई है. हम भी इसी मुआवजे की आस में बैठे हैं. मुझे आज तक अपनी जमीन का मुआवजा नहीं मिला है. 112 साल की गिरदावरी चली आ रही है. हमने भी कोर्ट केस किया हुआ है. मेरी सिर्फ अकेली जमीन गई है. प्रशासन के आगे मेरी भी नहीं चली, लेकिन मुझे आज तक कोई मुआवजा नहीं मिला है.

