सीएम विजय की करीबी एक्ट्रेस तृषा पर की थी आपत्तिजनक टिप्पणी
(द भारत ख़बर), चेन्नई: अभिनेत्री तृषा पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में गिरफ्तार किए गए तमिलनाडु के नेता प्रतिपक्ष और पूर्व डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन को पूछताछ के बाद रिहा कर दिया गया है। तमिलनाडु पुलिस ने उदयनिधि स्टालिन से 8 घंटे के करीब पूछताछ की। पुलिस ने उनके खिलाफ 6 धाराओं में केस दर्ज किया है।
गिरफ्तारी से बचने के लिए उदयनिधि ने मद्रास हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की थी। हालांकि, उस पर सुनवाई होने से पहले ही पुलिस ने उन्हें अरेस्ट कर लिया। आपको बता दें कि टीवीके ने 234 में से 108 सीटें जीती थीं। उस दिन तृषा का बर्थडे था। रिजल्ट आने से पहले वो तिरुमाला मंदिर पहुंचीं, दर्शन किए और फिर विजय के घर पहुंचीं।
क्यों हुई गिरफ्तारी?
इससे पहले ने उदयनिधि सोमवार को तंजावुर में कावेरी जल विवाद पर आयोजित रैली में भी मौजूद थे। इसी दौरान भीड़ में तृषा, तृषा के नारे लगे। आरोप है कि इस पर उदयनिधि ने कहा, पानी कहीं और पहुंचे या न पहुंचे, वहां जरूर पहुंचना चाहिए। बाद में सफाई दी कि उनका इशारा कावेरी के पानी की ओर था।
काफी चर्चा में रही विजय और तृषा की केमिस्ट्री
विजय और तृषा की केमिस्ट्री काफी चर्चा में रही है। दोनों करीब 5 फिल्मों में साथ नजर आए हैं, जिनमें से 2023 में रिलीज सुपरहिट फिल्म लियो भी शामिल है। यह वही वक्त था जब विजय की पत्नी संगीता सोर्नालिंगम तलाक के लिए कोर्ट में लड़ाई लड़ रही थीं।
टीवीके ने घोषणा पत्र में कहा था- कावेरी का पानी तमिलनाडु को दिलाएंगे
विजय की पार्टी टीवीके ने अपने घोषणा-पत्र में कहा था कि तमिलनाडु के कावेरी जल अधिकारों की पूरी रक्षा की जाएगी। राज्य के हिस्से का पानी हर हाल में सुनिश्चित कराया जाएगा। कर्नाटक की मेकेदातु बांध परियोजना का विरोध जारी रखा जाएगा। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के आदेशों को सख्ती से लागू कराने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जाएगा।
क्या हैं कावेरी जल विवाद?
कावेरी जल विवाद कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर है। नदी कर्नाटक से निकलकर तमिलनाडु की ओर बहती है। कर्नाटक इसका उपयोग सिंचाई और पीने के पानी के लिए करता है, जबकि तमिलनाडु का कृषि क्षेत्र पूरी तरह इसी पर निर्भर है।
1924 के ब्रिटिशकालीन समझौते के तहत पानी का बड़ा हिस्सा तमिलनाडु को दिया गया था। लेकिन कर्नाटक का कहना है कि ये पुराने नियम गलत हैं और कम बारिश के सालों में वह पानी नहीं छोड़ सकता। वहीं तमिलनाडु का कहना है कि समय पर पानी न मिलने से उसके किसानों की फसलें बर्बाद हो जाती हैं।
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