Gurugram Temple Demolition News: गुरुग्राम के सेक्टर-50 इलाके में बाबा बालक नाथ मंदिर और समाधि को प्रशासन ने बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया। शुक्रवार तड़के हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) की टीम ने पुलिस बल की मौजूदगी में मंदिर परिसर में कार्रवाई की। इसके बाद ग्रामीणों और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति बन गई। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा और बैरिकेडिंग कर लोगों की आवाजाही प्रतिबंधित कर दी गई। कार्रवाई के दौरान मंदिर की मूर्तियों को हटाकर दूसरे मंदिरों में स्थापित कराया गया और गायों को गौशाला भेजा गया। इसके बाद मंदिर परिसर को ध्वस्त कर करीब चार एकड़ जमीन को खाली कराया गया। ग्रामीणों ने प्रशासन पर बिल्डर्स के दबाव में यह कार्रवाई करने का आरोप लगाया है।
मंदिर हटाने को लेकर क्यों हुआ विवाद?
प्रशासन की कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों का दावा है कि यह स्थान लंबे समय से धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा है और बाबा बालक नाथ का डेरा यहां कई दशकों से मौजूद था। प्रशासन को मंदिर और समाधि हटाने से पहले स्थानीय लोगों की आपत्तियों पर विचार करना चाहिए था। NGT ने 24 अगस्त को करीब 2.5 एकड़ के उस जल निकाय से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था, जिसे राजस्व रिकॉर्ड में जोहड़ के रूप में दर्ज बताया गया है। सर्वे में मंदिर, एक पक्का ढांचा और सात झुग्गियों के अलावा सड़क और फुटपाथ का भी उल्लेख किया गया था। ट्रिब्यूनल ने जलाशय के पुनरुद्धार और उसे बहाल करने के निर्देश दिए। यही आदेश अब मंदिर हटाने की कार्रवाई के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन पर कार्रवाई हुई, उसका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है और वे प्रशासन की कार्रवाई से सहमत नहीं हैं।
पुलिस की भारी तैनाती, मीडिया के साथ अभद्रता
कार्रवाई के दौरान इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए गए ताकि ग्रामीण और अन्य लोग कार्रवाई वाली जगह तक न पहुंच सकें। पुलिस की नाकेबंदी के कारण आसपास के इलाकों में आवाजाही प्रभावित हुई और कुछ स्कूल बसों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। पुलिस ने इस कार्रवाई की कवरेज करने पहुंचे मीडिया कर्मियों से भी अभद्रता की। स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच कई बार बहस और तनातनी की स्थिति बनी। ग्रामीणों का भी आरोप है कि प्रशासन ने कार्रवाई के दौरान उनके साथ सख्ती और अभद्रता की।
तिजारा विधायक महंत बालक नाथ मौके पर पहुंचे
मंदिर हटाए जाने की सूचना मिलने के बाद राजस्थान के तिजारा से विधायक और नाथ संप्रदाय से जुड़े महंत बालक नाथ भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से कार्रवाई को लेकर सवाल किए। महंत बालक नाथ ने आरोप लगाया कि करीब डेढ़ सौ साल पुराने डेरे को हटाकर जमीन बिल्डरों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने सरकार को पूरी स्थिति की सही जानकारी नहीं दी है। बिल्डरों से मिलीभगत का यह आरोप स्थानीय लोगों और महंत बालक नाथ की ओर से लगाया गया है।
ग्रामीणों का दावा- वर्षों से मौजूद है मंदिर
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि झाड़सा गांव की पंचायत के जरिए यह जमीन बाबा बालक नाथ के आश्रम के लिए दी गई थी और लंबे समय से यहां धार्मिक गतिविधियां होती रही हैं। उनका दावा है कि मंदिर परिसर में संतों की समाधियां भी मौजूद थीं। ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमीन को लेकर विवाद केवल अतिक्रमण का नहीं, बल्कि लंबे समय से धार्मिक उपयोग में रही जगह के भविष्य का भी है। स्थानीय लोगों ने यह भी दावा किया कि कार्रवाई से पहले मंदिर के महंत को पुलिस अपने साथ ले गई और उनका मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में पुलिस से जानकारी मांगी, लेकिन उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
रविवार को महापंचायत का किया ऐलान
कार्रवाई के बाद ग्रामीणों ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। ग्रामीणों के मुताबिक रविवार को झाड़सा गांव में महापंचायत बुलाई जाएगी। इसमें मंदिर हटाने की कार्रवाई के खिलाफ आगे की रणनीति तय की जाएगी। फिलहाल मामले में दो पक्षों की अलग-अलग दलीलें सामने आ रही हैं। प्रशासन और न्यायिक रिकॉर्ड में कार्रवाई का आधार जल निकाय पर अतिक्रमण हटाना और उसे बहाल करना है, जबकि ग्रामीण और महंत बालक नाथ इसे धार्मिक स्थल हटाने तथा जमीन के इस्तेमाल से जुड़ा विवाद बता रहे हैं।


