JNU Professor Harassment Case: दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में एक प्रोफेसर पर वाइवा में ज्यादा नंबर देने के बदले छात्राओं से संबंध बनाने की बात करने के गंभीर आरोप लगे हैं। यह मामला मई 2026 का है, जब यूनिवर्सिटी में वाइवा हुआ था। एक छात्रा ने स्टूडेंट्स के व्हाट्सएप ग्रुप में अपना डरावना एक्सपीरिएंस शेयर किया। इसके बाद कई अन्य छात्राओं ने भी इसी तरह के आरोप लगाए और कुल 11 लड़कियों ने यूनिवर्सिटी की इंटरनल कंप्लेंट कमेटी (ICC) में प्रोफेसर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। छात्राओं की शिकायतों में गंदे कमेंट, गलत व्यवहार और ज्यादा नंबर देने के बदले संबंध बनाने की मांग करने जैसे गंभीर आरोप हैं। यह मामला सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी में हड़कंप मच गया है।
WhatsApp मैसेज से सामने आई कई शिकायतें
मई के पहले सप्ताह में वाइवा परीक्षा के बाद एक छात्रा ने स्टूडेंट्स के एक WhatsApp ग्रुप में अपना एक्सपीरिएंस शेयर किया। बताया जाता है कि उसकी बात सामने आने के बाद दूसरे छात्राओं ने भी अपने अनुभव शेयर करने शुरू किए। कुछ छात्राओं ने आरोप लगाया कि वाइवा के दौरान प्रोफेसर ने अश्लील कमेंट किए और यह संकेत दिया कि संबंध बनाने पर उन्हें ज्यादा नंबर मिल सकते हैं। इन आरोपों के सामने आने के बाद मामला यूनिवर्सिटी की इंटरनल कमेटी तक पहुंचा। ICC ने शिकायतों पर प्रक्रिया शुरू करते हुए छात्रों को अपने बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया है।
क्लास और निजी मुलाकातों को लेकर भी आरोप
शिकायतें सिर्फ वाइवा परीक्षा तक सीमित नहीं बताई जा रही हैं। कुछ छात्राओं ने आरोप लगाया है कि प्रोफेसर ने उन्हें JNU कैंपस स्थित अपने आवास पर आयोजित कार्यक्रमों में बुलाया, जहां गलत व्यवहार का सामना करना पड़ा। कुछ शिकायतों में क्लासेस के दौरान अश्लील या आपत्तिजनक कमेंट किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। इन आरोपों की भी ICC द्वारा जांच की जा रही है।
छुट्टियों के बाद फिर चर्चा में आया मामला
शिकायत सामने आने के कुछ समय बाद यूनिवर्सिटी में करीब 45 दिनों का सेमेस्टर ब्रेक शुरू हो गया। जुलाई में जब छात्र वापस लौटे और कक्षाएं दोबारा शुरू हुईं, तो कैंपस में यह मामला फिर चर्चा में आने लगा। शिकायतों का दायरा बढ़ गया और ICC के सामने कई छात्रों के बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। मामले की जांच JNU की इंटरनल कंप्लेंट कमेटी कर रही है। समिति ने मामले पर कमेंट करने से इनकार किया है और इसे विश्वविद्यालय की आंतरिक प्रक्रिया बताया है। JNU प्रशासन की ओर से भी आरोपों पर फिलहाल कोई बयान सामने नहीं आया है।

