नई दिल्ली. क्रिकेट की दुनिया में कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जो सिर्फ रिकॉर्ड बुक का हिस्सा नहीं बनतीं. ऐसी कहानियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन जाती हैं. भारतीय क्रिकेट की एक ऐसा गेंदबाज जिसने टेस्ट मैच में 14 विकेट झटके और फिर भी टीम से बाहर कर दिया गया. यह बात साल 1959 की है. कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए मुकाबले में 35 साल ऑफ स्पिनर जसुभाई मोतीभाई पटेल ने दोनों पारी में विकेट चटकाए लेकिन इस सीरीज के बाद उनको कभी मौका नहीं मिला.
भारतीय टीम के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया ने 1959-60 में भारत का दौरा किया था. 5 मैचों की सीरीज में मेहमान टीम ने 2-1 से अपने नाम किया था. दिल्ली में खेले गए मैच को पारी और 127 रन से गंवाने के बाद भारतीय टीम ने कानपुर में खेले गए दूसरे मुकाबले में जबरदस्त वापसी करते हुए जीत दर्ज की. 119 रन की बड़ी जीत के हीरो रहे थे स्पिन गेंदबाजी के कहर ढाने वाले जसुभाई पटेल. उनकी घातक गेंदबाजी ने ऑस्ट्रेलिया को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था.
पारी की हार के बाद ऑस्ट्रेलिया खिलाफ उतरी भारतीय टीम के लिए पहली पारी में जसुभाई पटेल अकेले ही लगभग पूरी टीम को निपटा दिया. मेहमान टीम ने 219 रन बनाए और 9 विकेट अकेले भारतीय स्पिनर ने झटके. उन्होंने ग्रीन पार्क की पिच का भरपूर फायदा उठाया. पटेल ने 35.5 ओवर में सिर्फ 69 रन देकर 9 विकेट हासिल किए. इससे पहले ऐसा प्रदर्शन किसी भी भारतीय गेंदबाज ने नहीं किया था. उनका जादू दूसरी पारी में भी देखने को मिला और 5 विकेट चटकाए. इस तरह पूरे मैच में उन्होंने कुल 14 विकेट हासिल किए. उनके इस प्रदर्शन के दम पर भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरा टेस्ट जीतकर 1-1 की बराबरी हासिल की.
जिस स्पिनर ने कानपुर में भारत की तरफ से सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन किया उसका करियर इसके महज तीन टेस्ट के बाद ही खत्म हो गया. ब्रेबॉर्न में सीरीज का तीसरा मुकाबला खेला गया जो ड्रॉ हुआ. इसमें वो प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं थे. चेन्नई के खिलाफ चौथे मैच में भारत को पारी की हार मिली जिसमें जसुभाई ने 2 विकेट झटके थे. कोलकाता के ईडन गार्डन्स पर खेला गया आखिरी और 5वां टेस्ट मैच. इस स्पिनर ने पहली पारी में 3 विकेट चटकाए लेकिन दूसरी पारी में उनका खाता खाली रहा. कमाल की बात यह रही कि उस सीरीज के बाद उनको फिर कभी मौका नहीं मिला. सोचने वाली बात है कि जिसने एक पारी में 9 विकेट झटके हों उसे आगे सिर्फ 2 ही मैच खेलने का मौका मिला.

