अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की पहली डिप्टी सीएम बनीं पत्नी सुनेत्रा, राज्यपाल ने दिलाई पद व गोपनीयता की शपथ
Deputy CM Sunetra Pawar, (द भारत ख़बर), मुंबई: राज्यसभा सदस्य सुनेत्रा पवार ने महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। राजभवन में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने सुनेत्रा पवार को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ लेने से पहले उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले उन्हें दोपहर में राकांपा विधायक दल का नेता चुन लिया गया। महाराष्ट्र के इतिहास में पहली बार कोई महिला डिप्टी सीएम बनी हैं।
अजित पवार की प्लेन हादसे में मौत के बाद से ही सुनेत्रा को डिप्टी सीएम बनाने की मांग की जाने लगी थी। अब ऐसे में यह जानना अहम है कि सुनेत्रा पवार कौन हैं? बारामती के ‘दादा’ अजित पवार से इतर उनकी अपनी क्या पहचान रही है? उनका पारिवारिक इतिहास क्या रहा है? अजित पवार से उनकी शादी कैसे हुई? सुनेत्रा की राजनीति में कब एंट्री हुई? आइये जानते हैं…
1963 में मराठी परिवार में हुआ जन्म
सुनेत्रा पवार का जन्म 1963 में उस्मानाबाद (अब धाराशिव) में एक मराठी परिवार में हुआ था। सुनेत्रा ने औरंगाबाद (अब छत्रपति संभाजीनगर) के एसबी कॉलेज से बीकॉम की डिग्री हासिल की। एक राजनीतिक परिवार से आने के बावजूद सुनेत्रा पवार राजनीति से दूर ही रहीं।
पवार परिवार से जुड़ने के बाद भी उन्होंने अपना ध्यान सामाजिक कार्यों में लगाया और बारामती के करीब पवार खानदान के पैतृक गांव काठेवाड़ी में कई कार्य कराए। खासकर साफ-सफाई को लेकर। उनके कार्यों की वजह से 2006 में काठेवाड़ी को निर्मल ग्राम का दर्जा दिया गया और घोषित किया गया कि यह गांव खुले में शौच से मुक्त हो गया है।
बारामती में बनवाया हाईटेक टेक्सटाइल पार्क
इतना ही नहीं सुनेत्रा ने 2008 में बारामती में हाईटेक टेक्सटाइल पार्क बनवाने में भी अहम भूमिका निभाई। 65 एकड़ के इस पार्क को केंद्र की टेक्सटाइल पार्क स्कीम के जरिए स्थापित कराया गया और मौजूदा समय में यहां 15 हजार लोगों को नौकरी मिली है। इनमें से अधिकतर महिलाएं हैं, जो कपड़ा उद्योग, सिलाई, बुनाई और कढ़ाई में काम कर रही हैं। सुनेत्रा पवार ने इस पूरे प्रोजेक्ट की अध्यक्षता की है।
सुनेत्रा के भाई रह चुके महाराष्ट्र के गृहमंत्री, दबंग नेता के तौर पर जाते है जाने
सुनेत्रा का परिचय शुरूआत में ही राजनीति से हो गया, क्योंकि उनके पिता बाजीराव पाटिल महाराष्ट्र के मजबूत नेता थे। वहीं, उनके भाई पदमसिंह बाजीराव पाटिल 1980 के दशक में महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे ताकतवर नेताओं में से एक रहे। पदमसिंह कई बार विधायक रहने के साथ-साथ सांसद भी रहे। वे 80 के दशक में ही महाराष्ट्र के गृह मंत्री भी बने। सुनेत्रा के भाई पदमसिंह को महाराष्ट्र की राजनीति में दबंग छवि के नेता के तौर पर जाना जाता है। यानी सुनेत्रा पवार परिवार में आने से पहले ही एक मजबूत राजनीतिक परिवार से जुड़ी थीं।
अजित पवार से शादी की कहानी
सुनेत्रा पवार के 1983 में ग्रैजुएशन पूरा करने के बाद 1985 में उनकी शादी अजित पवार से हुई। इस रिश्ते के पीछे की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। दरअसल, पदमसिंह उस दौरान महाराष्ट्र की राजनीति के बड़े नेताओं में से थे। वहीं, शरद पवार भी अपनी अलग पहचान स्थापित कर चुके थे।
दोनों ही नेताओं में अच्छी दोस्ती थी। यही दोस्ती बाद में रिश्ते में बदली, जब पदमसिंह ने बहन सुनेत्रा का रिश्ता शरद पवार के भतीजे अजित से तय कर दिया। अजित और सुनेत्रा पवार के दो बेटे हुए। बड़े बेटे का नाम पार्थ पवार और छोटे बेटे जय हैं।
अजित-सुनेत्रा के दो बच्चे कौन?
पार्थ 2019 में महाराष्ट्र के मावल से लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। रिपोर्ट के अनुसार, पार्थ पवार तब सुर्खियों में आए जब उन्होंने तत्कालीन महाविकास अघाड़ी सरकार के रुख के विपरीत, तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख को पत्र लिखकर सुशांत सिंह राजपूत की मौत की सीबीआई जांच का अनुरोध किया था। अजित के छोटे बेटे का नाम जय पवार है, जो फिलहाल राजनीति में नहीं हैं। जय उद्यमिता के क्षेत्र में अपना करियर बना रहे हैं।
सुनेत्रा का राजनीतिक इतिहास
सुनेत्रा पवार मौजूदा समय में राज्यसभा सांसद हैं और बीते कुछ दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में एक उभरता हुआ प्रमुख चेहरा बनकर उभरी हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि वे दशकों से राजनीतिक परिवार का हिस्सा रही हैं, लेकिन उन्होंने सक्रिय चुनावी राजनीति में अपना कदम हाल ही में रखा है। सुनेत्रा के जीवन में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट 2023 के अंत में आया, जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का विभाजन हुआ। यहां से उनकी पहली बार सक्रिय राजनीति में एंट्री हुई।
2024 में लड़ा लोकसभा चुनाव
सुनेत्रा के चुनावी करियर की शुरूआत 2024 के लोकसभा चुनावों से हुई, जब वे बारामती निर्वाचन क्षेत्र से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित गुट) के टिकट पर उतरीं। इस चुनाव में उन्होंने अपनी ननद और शरद पवार की बेटी- सुप्रिया सुले के खिलाफ चुनाव लड़ा, जो पवार परिवार और पार्टी में विभाजन का प्रतीक बना। हालांकि, इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लोकसभा चुनाव के बाद उन्हें जून 2024 में राज्यसभा के लिए नामित किया गया।
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