- देखभाल, संवेदनशीलता और संवाद से हर बच्चे को नशे की लत से बचाया जा सकता है: डॉ. बलबीर सिंह
- बच्चों के लिए ऐसा सुरक्षित सहारा बनें कि नशा उनके लिए कभी बचने का रास्ता न बने: डॉ. ईशान प्रकाश
चंडीगढ़ : भगवंत मान सरकार के ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के तहत अब नशे की आपूर्ति पर रोक लगाने के साथ-साथ नशे की चपेट में आने की आशंका को शुरुआती स्तर पर पहचानने पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि युवाओं को उस समय ही मदद मिल जाए, जब कभी-कभार या प्रयोग के तौर पर किया जाने वाला नशीले पदार्थों का सेवन आगे चलकर नशे पर निर्भरता या लत में न बदल पाए। ऐसे में अभिभावकों के सामने एक सीधा सवाल है: क्या परिवार के सदस्य ऐसे संकेतों को पहचान सकते हैं, जिनके आधार पर समय रहते हस्तक्षेप कर बच्चे को नशे की लत में जाने से रोका जा सके? विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे संकेत मौजूद होते हैं।
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा, “देखभाल, संवेदनशीलता और संवाद के माध्यम से हर बच्चे को नशे की लत से बचाया जा सकता है। परिवार, देखभाल करने वालों और पूरे समाज के रूप में हमें अपनी आँखें, कान और दिल खुले रखने होंगे।” उन्होंने आगे कहा, “यदि आपको अपने किसी करीबी व्यक्ति के व्यवहार में कुछ चिंताजनक बदलाव दिखाई दें, तो उन पर ध्यान दें और संवेदनशीलता के साथ प्रतिक्रिया दें।”
शुरुआती संकेतों की पहचान
नशे की लत हमेशा किसी बड़े या स्पष्ट चेतावनी संकेत के साथ सामने नहीं आती। अक्सर इसकी शुरुआत बहुत चुपचाप होती है—जैसे व्यवहार में बदलाव, पुराने दोस्तों की जगह नए दोस्तों का आ जाना, किसी गोपनीय या छिपे हुए समूह का हिस्सा बन जाना, घंटों बाथरूम या अंदर से बंद कमरे में रहना, या उन गतिविधियों और शौकों में अचानक रुचि खत्म हो जाना, जो पहले बच्चे के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण हुआ करते थे।
अभिभावक बच्चे से बात करें तो उन्हें गुस्से के दौर, भावनात्मक उबाल जैसे व्यावहारिक बदलाव नज़र आ सकते हैं। स्कूल या शिक्षकों की ओर से बार-बार शिकायतें मिलना भी एक संकेत हो सकता है। नींद में बदलाव भी महत्त्वपूर्ण संकेत है। पूरी रात जागते रहना, असामान्य समय पर सोना या दिनचर्या में अचानक बदलाव इस बात का संकेत हो सकता है कि कुछ ठीक नहीं है। इसी तरह, बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार पैसे माँगना और यह न बता पाना कि पैसा कहाँ ख़र्च हुआ, या घर में पैसे गायब होना भी चिंता का कारण हो सकता है।
रूप-रंग और व्यक्तिगत स्वच्छता की उपेक्षा, भूख कम होना या वजन घटना तथा खान-पान की आदतों में बदलाव भी चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा कुछ शारीरिक संकेत भी दिखाई दे सकते हैं, जैसे आँखों का लाल या बुझा-बुझा दिखना, पुतलियों के आकार में असामान्य बदलाव, अत्यधिक उनींदापन या बार-बार थकान महसूस होना, बेचैनी, हाथ-पैर काँपना, बोलने में अस्पष्टता, शरीर के तालमेल में कमी, बार-बार चोट के निशान या गंभीर मामलों में इंजेक्शन लगाने के निशान।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि किसी एक संकेत के आधार पर नशीले पदार्थों के सेवन की पुष्टि नहीं की जा सकती। किशोर का कभी-कभार देर रात तक जागना सामान्य हो सकता है, लेकिन यदि कोई बच्चा लगातार ख़ुद को अलग-थलग रखने लगे, अत्यधिक गोपनीय व्यवहार करे, अपने आसपास की चीज़ों के प्रति उदासीन नज़र आए और मामूली सवाल पूछने पर भी रक्षात्मक हो जाए, तो इन संकेतों के एक साथ दिखाई देने पर इसे एक व्यवहारिक पैटर्न के रूप में देखा जाना चाहिए। ऐसे समय में अभिभावकों को विशेषज्ञ की मदद लेने पर विचार करना चाहिए।
जिला नोडल मनोचिकित्सक, संगरूर, डॉ. ईशान प्रकाश ने कहा, “परिवारों द्वारा की जाने वाली सबसे बड़ी गलतियों में से एक है मदद लेने से पहले इंतजार करते रहना। बच्चा नशीले पदार्थों का सेवन कर रहा है, यह साबित करने के लिए बातचीत शुरू करने या किसी विशेषज्ञ से सलाह लेने से पहले पुख्ता सबूत का इंतज़ार करना ज़रूरी नहीं है।हमारे समाज में कई अभिभावकों की सामाजिक कलंक या ‘लोग क्या कहेंगे’ जैसी चिंता ,युवा को समय पर सहायता मिलने में बाधा बन सकती है। किसी युवा के गंभीर परेशानी में पहुँचने का इंतज़ार करने के बजाय समय रहते मार्गदर्शन लेना हमेशा बेहतर होता है।” उन्होंने कहा, “एक देखभाल करने वाला अभिभावक नशे की लत के ख़िलाफ़ पहली सुरक्षा पंक्ति है। बच्चों के लिए ऐसा सुरक्षित सहारा बनें कि नशा उनके लिए कभी बचने का रास्ता न बने।”
समय रहते हस्तक्षेप
एक बार व्यवहार में किसी तरह का पैटर्न नज़र आने लगे, तो उसे पहचानने के साथ-साथ अभिभावक की प्रतिक्रिया भी उतनी ही महत्त्वपूर्ण हो जाती है। बच्चे को भाषण देने या डाँटने के बजाय खुले सवाल पूछना, शांत और निष्पक्ष रवैया अपनाना तथा बच्चे की बात को वास्तव में ध्यान से सुनना अधिक प्रभावी होता है। उदाहरण के लिए, “हमें लगता है कि कोई बात तुम्हें परेशान कर रही है। क्या तुम बताना चाहोगे कि इन दिनों स्कूल में क्या चल रहा है?” जैसे सरल सवाल सीधे आरोप लगाने की तुलना में बातचीत के लिए कहीं अधिक बेहतर माहौल बना सकते हैं।
यदि अभिभावकों को पता चलता है कि बच्चा नशीले पदार्थों का सेवन कर रहा है, तो स्वाभाविक रूप से कड़ी प्रतिक्रिया देने का मन हो सकता है, लेकिन ऐसा करना अक्सर स्थिति को और बिगाड़ सकता है। भावनात्मक रूप से तनावपूर्ण टकराव बच्चे को और अधिक गोपनीयता की ओर धकेल सकता है। ऐसे में बेहतर तरीका है कि अभिभावक पहले खुद को शांत करें और फिर बच्चे के साथ निजी और शांतिपूर्ण बातचीत करें, जिसका उद्देश्य उसके व्यवहार के पीछे के कारणों को समझना हो। यदि नशीले पदार्थों के सेवन का संदेह हो या बच्चा स्वयं इसकी जानकारी दे, तो अभिभावकों को उसे शर्मिंदा करने, धमकाने, किसी नकारात्मक नाम या लेबल से संबोधित करने अथवा केवल सज़ा पर निर्भर रहने से बचना चाहिए, क्योंकि ऐसे तरीके बच्चे को मदद माँगने से हतोत्साहित कर सकते हैं। इसके बजाय, अभिभावकों को उसकी बात ध्यान से सुननी चाहिए, अपनी चिंता और परवाह व्यक्त करनी चाहिए तथा बच्चे के साथ मिलकर उसके लिए उचित सहायता और उपचार का रास्ता तलाशना चाहिए।
यदि आप अपने बच्चे को लेकर चिंतित हैं या यह समझ नहीं पा रहे हैं कि शुरुआत कहां से करें, तो आपको यह सब अकेले करने की ज़रूरत नहीं है। परिवार टेली-मानस हेल्पलाइन 1800-89-14416 पर संपर्क कर गोपनीय और विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।
