Stock Market Today Update: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से निवेशकों की चिंता बढ़ी। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट दर्ज की गई। वहीं, डॉलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर होकर 95 के स्तर के आसपास पहुंच गया। बुधवार के शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 500 अंक तक गिर गया। निफ्टी भी 23,500 के आसपास आ गया। बाद में बाजार ने कुछ नुकसान की भरपाई की, लेकिन दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बने रहे।
सुबह करीब 10:30 बजे सेंसेक्स 75,131 के आसपास और निफ्टी 23,541 के करीब कारोबार कर रहा था। इससे पहले मंगलवार को भी बाजार में बड़ी गिरावट रही थी। सेंसेक्स 555.23 अंक गिरकर 75,577.58 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 144.05 अंक टूटकर 23,635.10 पर आ गया था। बाजार की गिरावट में IT कंपनियों के शेयरों पर खास दबाव रहा। HCL Tech, Tech Mahindra, Infosys और TCS जैसे बड़े IT शेयर शुरुआती कारोबार में कमजोर रहे। बुधवार को प्रमुख सेक्टरों में से 12 सेक्टर गिरावट में रहे और IT इंडेक्स में करीब 3 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। कुछ ऊर्जा और अन्य चुनिंदा शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। इससे बाजार की शुरुआती गिरावट कुछ कम हुई।
100 डॉलर के करीब पहुंचा कच्चा तेल
शेयर बाजार पर सबसे बड़ा दबाव इस समय कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का है। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। बुधवार को ब्रेंट क्रूड करीब 99.5 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। तेल की कीमतें जुलाई के बाद पहली बार 100 डॉलर के स्तर के इतने करीब आई हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए तेल महंगा होने पर देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। इससे निवेशकों की चिंता बढ़ रही है।
भारतीय रुपया भी दबाव में आया
कच्चे तेल की तेजी का असर भारतीय रुपये पर भी पड़ा। बुधवार को रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ और 95 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया। तेल की बढ़ती कीमत और डॉलर की मांग के कारण रुपये पर दबाव बना। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से बाजार में हस्तक्षेप के बावजूद मुद्रा पर दबाव बढ़ा है। इससे पहले मंगलवार को रुपया 18 पैसे कमजोर होकर 94.74 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली भी जारी है। 8 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने करीब 123 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी कर बाजार को कुछ सहारा दिया। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमत, पश्चिम एशिया का तनाव और अमेरिका के ब्याज दरों से जुड़े फैसले बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
आगे भी बाजार में उतार-चढ़ाव संभव
पश्चिम एशिया में तनाव अगर लंबे समय तक बना रहता है और तेल की कीमत 100 डॉलर से ऊपर जाती है तो भारतीय बाजार पर दबाव और बढ़ सकता है। महंगा तेल भारत के लिए आयात लागत बढ़ाता है और महंगाई की चिंता पैदा करता है। फिलहाल निवेशक कच्चे तेल की कीमत और पश्चिम एशिया से जुड़ी खबरों पर नजर बनाए हुए हैं। बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।

