Sonia Gandhi voter list case: कांग्रेस नेता सोनिया गांधी का नाम नागरिकता हासिल करने से तीन साल पहले मतदाता सूची में शामिल किए जाने के आरोप की जांच फिर से शुरू हो सकती है। दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें सोनिया गांधी के नागरिकता हासिल करने से तीन साल पहले मतदाता सूची में शामिल किए जाने के आरोप की जांच से इनकार किया गया था।
मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द
दिल्ली कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट का आदेश बिना ठोस कारण बताए दिया गया था और इससे पता चलता है कि मामले पर ठीक से विचार नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट के आदेश में शिकायत को अधूरा बताया गया था और इसमें कानून की स्पष्ट गलती थी।
मजिस्ट्रेट को भेजा गया मामला
कोर्ट ने यह भी कहा कि FIR दर्ज करने का निर्देश देने के बजाय मजिस्ट्रेट का आदेश नागरिकता के मुद्दे की ओर भटक गया। इसके बाद, कोर्ट ने मामलों को मजिस्ट्रेट के पास वापस भेज दिया है, ताकि वे ठोस कारणों के साथ आदेश जारी कर सकें। साथ ही, दलीलों पर फिर से सुनवाई का आदेश दिया है।
1983 से पहले वोटर लिस्ट में नाम का आरोप
यह मामला याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी की ओर से दायर की गई है। त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची में वर्ष 1983 में भारतीय नागरिक बनने से पहले शामिल किया गया था। उन्होंने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी, जिसे राउज एवेन्यू स्थित एसीजेएम की अदालत ने खारिज कर दिया था। इसी आदेश को पुनरीक्षण याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई थी।
भाजपा का आरोप- सोनिया का नाम दो बार जोड़ा गया
पहली बार 1980 में नाम जोड़ा: वोटर लिस्ट में सोनिया का नाम पहली बार 1980 में जोड़ा गया। उस समय वे इटली की नागरिक थीं। तब गांधी परिवार 1, सफदरजंग रोड, प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सरकारी निवास पर रहता था। उस समय इस पते पर इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, संजय गांधी और मेनका गांधी के नाम थे। 1 जनवरी 1980 में नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र की वोटर्स लिस्ट में संशोधन हुआ, जिसमें सोनिया गांधी का नाम पोलिंग स्टेशन 145 में क्रम संख्या 388 पर जोड़ा गया।
दूसरी बार 1983 में नाम जोड़ा गया: 1982 में विरोध के बाद उनका नाम लिस्ट से हटा दिया गया था और 1983 में उनका नाम पोलिंग स्टेशन 140 में क्रम संख्या 236 पर फिर से जोड़ दिया गया। समस्या यह थी कि इस संशोधित सूची के लिए योग्यता की तारीख 1 जनवरी 1983 थी, जबकि सोनिया गांधी को भारतीय नागरिकता 30 अप्रैल 1983 को मिली थी। यानी वोटर लिस्ट में नाम जोड़े जाने के वक्त वे भारतीय नागरिक नहीं थीं।

