भारत ही नहीं पूरा विश्व पर्यावरण असंतुलन के बुरे परिणाम भुगत रहा
Rising Global Temperatures (द भारत ख़बर), नई दिल्ली : भारत सहित पूरे विश्व के लिए वर्तमान में जो सबसे बड़ा प्राकृतिक खतरा भयानक रूप ले रहा है वह है पर्यावरण असंतुलन। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगि विकास की भेंट पिछले कुछ दशकों में अनगिनत पेड़ चढ़े हैं। जोकि वर्तमान में पर्यावरण असंतुलन का सबसे बड़ा कारण बन रहे हैं। पेड़ कम होने के चलते सूर्य की किरणें सीधी और ज्यादा देर तक धरती पर पड़ रही हैं जिसका नतीजा यह निकल रहा है कि हर साल गर्मी में इजाफा हो रहा है और धरती का तापमान बढ़ रहा है।
100 करोड़ से अधिक लोगों पर मंडराया खतरा
भीषण गर्मी वैश्विक कृषि प्रणालियों को तबाही की कगार पर धकेल रही हैं। इससे वैश्विक खाद्य तंत्र बिगड़ने लगा है। इसके चलते दुनियाभर में 100 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका और उनके स्वास्थ्य पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अत्यधिक गर्मी अब केवल मौसम ही नहीं, बल्कि खेती, मछली पालन और वानिकी के लिए एक अस्तित्वगत खतरा बन गई है। एफएओ के जलवायु परिवर्तन कार्यालय के प्रमुख कावेह जाहेदी ने कहा, भीषण गर्मी यह तय कर रही है कि किसान और मछुआरे क्या उगा सकते हैं और कब काम कर सकते हैं।
फसलों पर इस तरह पड़ता है असर
अगर तापमान 1.5 डिग्री के बजाय 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ता है, तो भीषण गर्मी की तीव्रता और आवृत्ति चार गुना तक बढ़ सकती है। वैश्विक औसत तापमान में प्रत्येक एक डिग्री की वृद्धि से चार प्रमुख फसलों मक्का, चावल, सोयाबीन और गेहूं की पैदावार में लगभग 6% की कमी आती है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 अब तक के तीन सबसे गर्म वर्षों में से एक रहा है। जब तापमान 30 डिग्री की सीमा को पार कर जाता है, तो प्रमुख फसलों की पैदावार में तेजी से गिरावट आने लगती है।
धरती ही नहीं समुद्री जीवों के लिए भी हानिकारक
गर्मी का असर केवल जमीन तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में दुनिया के 91 फीसदी महासागरों ने कम से कम एक समुद्री लू का सामना किया। इससे पानी में आॅक्सीजन का स्तर कम हो रहा है, जिससे मछलियों का अस्तित्व खतरे में है और समुद्री खाद्य प्रणालियां चरमरा रही हैं। कृषि से संबंधित रिपोर्ट में बताया गया कि किसानों को मौसम का सटीक डेटा समय पर मिलना चाहिए ताकि वे बुवाई और कटाई के समय में बदलाव कर सकें।

