उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी (UP RERA) ने घर खरीदारों से इकट्ठा किए गए ‘इंटरेस्ट-फ्री मेंटेनेंस सिक्योरिटी’ (IFMS) फंड को इकट्ठा करने, मैनेज करने, इन्वेस्ट करने, ट्रांसफर करने और इस्तेमाल करने के लिए जुलाई में एक नया सिस्टम शुरू किया है। UP RERA (जनरल) रेग्युलेशंस, 2019 में संशोधित प्रावधान, रेग्युलेशन 47 के तहत जुलाई में लागू हो गए हैं।
नियमों में बदलाव क्यों?
UP RERA के चेयरमैन संजय आर. भूसरेड्डी ने कहा, ”इस बदलाव का मकसद IFMS फंड को इकट्ठा करने, इन्वेस्ट करने, ट्रांसफर करने और इस्तेमाल करने में पारदर्शिता, जवाबदेही और फाइनेंशियल डिसिप्लिन सुनिश्चित करना है। घर खरीदार यह रकम कॉमन सुविधाओं के लंबे समय तक रखरखाव के लिए जमा करते हैं। इसलिए, यह जरूरी है कि फंड पूरी तरह सुरक्षित रहे और इसका इस्तेमाल सिर्फ उसी मकसद के लिए हो जिसके लिए इसे बनाया गया है।”
उन्होंने कहा कि नए नियम IFMS फंड को सही तरीके से इकट्ठा करने, सुरक्षित इन्वेस्टमेंट, समय पर ट्रांसफर और अनिवार्य ऑडिट के जरिए अलॉटीज (घर पाने वालों) के हितों की रक्षा करेंगे और साथ ही रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के मैनेजमेंट में RWA की भूमिका को मजबूत करेंगे।
UP RERA के नए IFMS नियम:
- बदले हुए नियमों के तहत, प्रमोटर्स के लिए यह जरूरी है कि वे सेल, लीज या सब-लीज डीड के रजिस्ट्रेशन के समय अलॉटीज से IFMS की रकम इकट्ठा करें और पूरी रकम को किसी शेड्यूल्ड बैंक में एक अलग तय बैंक अकाउंट में जमा करें।
- नियमों में यह भी कहा गया है कि इकट्ठा किए गए फंड को योग्य बैंकों से कोटेशन लेने के बाद सबसे ज्यादा ब्याज दर वाली फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) स्कीम में इन्वेस्ट किया जाए, ताकि फंड की सुरक्षा, मैनेजमेंट में पारदर्शिता और ज्यादा से ज्यादा रिटर्न सुनिश्चित किया जा सके।
- UP RERA ने डेवलपमेंट के प्रकार और कैटेगरी के आधार पर प्रोजेक्ट के हिसाब से IFMS रेट तय किए हैं।
- ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए, रेजिडेंशियल यूनिट्स की कैटेगरी के आधार पर IFMS को ₹20-100 प्रति स्क्वायर फीट के बीच तय किया गया है।
- कमर्शियल प्रोजेक्ट्स के लिए, नॉन-सेंट्रली एयर-कंडीशंड डेवलपमेंट पर ₹40 प्रति स्क्वायर फीट और सेंट्रली एयर-कंडीशंड प्रोजेक्ट्स पर ₹50 प्रति स्क्वायर फीट का IFMS लगेगा।
- प्लॉट वाले रेजिडेंशियल और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स के लिए भी अलग-अलग रेट तय किए गए हैं।
- UP RERA ने यह अनिवार्य किया है कि प्रमोटर प्रोजेक्ट के कॉमन एरिया सौंपते समय पूरा IFMS फंड रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) या अलॉटीज एसोसिएशन को ट्रांसफर करें।
- प्रमोटर को एक डिटेल्ड ट्रांसफर स्टेटमेंट भी देना होगा जिसमें यूनिट-वाइज IFMS कलेक्शन, हुआ खर्च, ऑडिट ट्रेल और ट्रांसफर किया जा रहा फाइनल बैलेंस शामिल हो।
- संशोधनों में कहा गया है कि IFMS फंड का इस्तेमाल सिर्फ कॉमन एरिया, इक्विपमेंट और शेयर्ड सर्विस के ऑपरेशन, मेंटेनेंस, रिपेयर और रिप्लेसमेंट के लिए ही किया जा सकता है।
- इस फंड को दूसरे मेंटेनेंस चार्ज से अलग एक डेडिकेटेड बैंक अकाउंट में रखना होगा।
- RWA या अलॉटीज की एसोसिएशन को फंड की सभी प्राप्तियों, भुगतान और इस्तेमाल का सही हिसाब-किताब रखना होगा।
- अकाउंट्स का ऑडिट आम तौर पर स्वीकार किए जाने वाले अकाउंटिंग सिद्धांतों के अनुसार चार्टर्ड अकाउंटेंट से करवाना होगा और ऑडिट रिपोर्ट को पूरा होने के तीन महीने के अंदर एनुअल जनरल मीटिंग या एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल बॉडी मीटिंग में पेश करना होगा।

