फरीदाबाद: महिलाओं में बार-बार यूटीआई यानी यूरिन इंफेक्शन की समस्या देखने को मिलती है. कई बार कम पानी पीना, पेशाब को ज्यादा देर तक रोकना या सफाई का सही तरीका न अपनाना इसकी वजह बन सकता है. कुछ महिलाएं लक्षण दिखाई देने पर खुद ही एंटीबायोटिक लेना शुरू कर देती हैं, जिससे आगे परेशानी बढ़ सकती है. अगर यूटीआई बार-बार हो रहा है या इसके साथ बुखार, उल्टी, कमर या पेट में तेज दर्द हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे लक्षण संक्रमण के किडनी तक पहुंचने का संकेत भी हो सकते हैं.
संक्रमण से होता है इंफेक्शन
फरीदाबाद अमृता अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. गार्गी अग्रवाल लोकल18 से बताती हैं कि महिलाओं की मूत्र नली यानी यूरेथ्रा पुरुषों के मुकाबले छोटी होती है. इसकी वजह से बैक्टीरिया के लिए मूत्र मार्ग तक पहुंचना आसान हो जाता है और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. अगर महिला कम पानी पीती है या साफ-सफाई का सही ध्यान नहीं रखती है, गंदे टॉयलेट का इस्तेमाल करती है, तो संक्रमण की संभावना और बढ़ सकती है.
पर्याप्त पानी पीना यूटीआई से बचाव में काफी मदद करता है. मूत्र मार्ग में कुछ सामान्य बैक्टीरिया मौजूद रहते हैं. जब महिला पर्याप्त पानी पीती है और समय पर पेशाब करती है, तो पेशाब के साथ कई बैक्टीरिया बाहर निकलते रहते हैं. इसे शरीर का एक तरह का प्राकृतिक सफाई का तरीका समझ सकते हैं. जब महिला बहुत कम पानी पीती है, तो यह प्रक्रिया ठीक तरह से नहीं हो पाती और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. गलत तरीके से सफाई करने पर खासकर मूत्र मार्ग में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. मल त्याग करने वाली जगह से बैक्टीरिया मूत्र मार्ग तक पहुंच सकते हैं. अगर पीछे से आगे की तरफ सफाई की जाती है, तो बैक्टीरिया आगे की तरफ आ सकते हैं और संक्रमण की संभावना बढ़ सकती है. इसलिए सफाई हमेशा आगे से पीछे की तरफ करनी चाहिए. टॉयलेट का इस्तेमाल करते समय भी साफ-सफाई का ध्यान रखना बहुत जरूरी है.
बिना डॉक्टर के परामर्श के न लें दवा
डॉ. गार्गी अग्रवाल बताती हैं कि आजकल कई बार महिलाओं को पेशाब में थोड़ी जलन होती है और वे बिना डॉक्टर से सलाह लिए मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खुद ही शुरू कर देती हैं. ऐसा करना बिल्कुल सही नहीं है. बार-बार या गलत तरीके से एंटीबायोटिक लेने से बैक्टीरिया पर दवा का असर कम हो सकता है और एंटीबायोटिक प्रतिरोध की समस्या पैदा हो सकती है. इसके बाद जरूरत पड़ने पर सही दवा भी संक्रमण पर ठीक से काम नहीं कर पाती. अगर पेशाब में जलन या संक्रमण के लक्षण हैं, तो डॉक्टर या स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए. बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई भी एंटीबायोटिक नहीं लेना चाहिए.
यूरिन इंफेक्शन का संक्रमण धीरे-धीरे नीचे के मूत्र मार्ग से ऊपर की तरफ बढ़ सकता है. निचले मूत्र मार्ग के संक्रमण में पेशाब करते समय जलन, बार-बार पेशाब लगना और कभी-कभी बुखार जैसी परेशानी हो सकती है. अगर इसके साथ तेज बुखार, ठंड लगना, उल्टी या कमर के पीछे की तरफ दर्द होने लगे, तो संक्रमण के किडनी तक पहुंचने की आशंका हो सकती है. अगर बुखार दवा लेने के बाद भी ठीक नहीं हो रहा है और कमर में तेज दर्द है, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए. ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर या अस्पताल से संपर्क करना जरूरी है.
ग्रामीण महिलाएं बतानें में करती हैं झिझक
यह विषय आज भी कई महिलाओं के लिए झिझक और परेशानी वाला है. महिलाओं के लिए जरूरी है कि वे अपनी समस्या को छिपाएं नहीं और समय पर डॉक्टर से सलाह लें. सही सफाई का तरीका समझना और उसे अपनाना बहुत जरूरी है. डॉ. गार्गी अग्रवाल बताती हैं कि महिलाओं को सूती यानी कॉटन के अंडरगारमेंट्स पहनने चाहिए. बहुत ज्यादा सिंथेटिक या पॉलिएस्टर वाले कपड़े पहनने से उस हिस्से में नमी और गर्मी बनी रह सकती है, जिससे परेशानी बढ़ सकती है. अगर महिला को लगता है कि वह दिनभर में बहुत कम पानी पी रही है या वह लंबे समय तक पेशाब रोककर रखती है, तो यह आदत ठीक नहीं है. पेशाब का रंग बहुत गहरा होना या पेशाब करते समय जलन होना भी शरीर में पानी की कमी या किसी दूसरी परेशानी का संकेत हो सकता है.
आजकल महिलाएं उस हिस्से की सफाई के लिए कई तरह के खुशबू वाले वॉश और साबुन का इस्तेमाल करती हैं. इनका बार-बार इस्तेमाल करने से उस हिस्से की प्राकृतिक संतुलन और त्वचा में जलन की समस्या हो सकती है. इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के तेज खुशबू वाले या केमिकल वाले प्रोडक्ट का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. उस हिस्से की सफाई के लिए सामान्य पानी और जरूरत के अनुसार हल्की सफाई पर्याप्त हो सकती है.
