फरीदाबाद. आजकल शादियां 2 महीने में ही टूट जाती हैं. मां-बाप एक-एक पैसा जोड़कर अपनी बेटी की शादी करते हैं, लेकिन वही बेटी ससुराल जाते ही कई बार दहेज के लिए प्रताड़ित होने लगती है. उसे ताने दिए जाते हैं और परेशान किया जाता है. हालांकि शादी से पहले हर चीज की बात हो जाती है और दोनों पक्षों की रजामंदी से शादी होती है. इसके बावजूद कुछ दहेज के लालची लोग लड़की को जान से मारने की कोशिश तक करते हैं और उसे ताने देकर प्रताड़ित करते हैं. ऐसे कई मामले सामने आते हैं. ऐसे मामलों में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब लड़की वालों की तरफ से शिकायत की जाती है और महिला थाना में लड़की और उसके ससुराल वालों के खिलाफ शिकायत दी जाती है, तो पुलिस की तरफ से जल्दी कार्रवाई क्यों नहीं होती.
कई बार पुलिस पहले दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने की कोशिश करती है. लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि पुलिस के नोटिस देने के बावजूद आरोपी पति या ससुराल पक्ष का कोई सदस्य पुलिस के सामने हाजिर नहीं होता है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर पुलिस आरोपी पति और ससुराल वालों के खिलाफ FIR दर्ज कर देती है और उसके बाद भी आरोपी पुलिस के नोटिस पर हाजिर नहीं होता है, तो पुलिस उसके खिलाफ क्या कार्रवाई कर सकती है. नोटिस के बावजूद अगर आरोपी हाजिर नहीं होता है तो आगे क्या होता है.
लोकल 18 से फरीदाबाद सेक्टर 12 कोर्ट के वकील मोहन तिवारी बताते हैं कि सबसे पहले कानून में जो प्रक्रिया है, उसके अनुसार ही पुलिस और न्यायालय काम करते हैं. यदि किसी की नई-नई शादी हुई है और लड़की को ससुराल में प्रताड़ना दी जा रही है, तो इसकी शिकायत पुलिस को की जाती है. शिकायत मिलने के बाद थाने की महिला SHO या जांच अधिकारी संबंधित पक्षों को नोटिस देकर बुला सकते हैं. शुरुआती स्तर पर कई मामलों में दोनों पक्षों को बुलाकर मामले को बातचीत और समझौते के जरिए सुलझाने की कोशिश की जाती है. दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाता है. अगर इस दौरान दोनों पक्षों के बीच मामला सुलझ जाता है तो आगे की कार्रवाई उसी के अनुसार होती है. अगर समझौता नहीं हो पाता और शिकायत में संज्ञेय अपराध बनता है, तो पुलिस कानून के अनुसार FIR दर्ज कर जांच आगे बढ़ाती है.
जांच में सहयोग न करने की क्या सजा
वकील मोहन तिवारी बताते हैं कि FIR दर्ज होने के बाद जांच के दौरान पुलिस आरोपी को पूछताछ या जांच में शामिल होने के लिए नोटिस दे सकती है. मौजूदा कानून के तहत अगर आरोपी को नोटिस जारी किया गया है तो उसका पालन करना उसकी जिम्मेदारी है. अगर आरोपी नोटिस के बावजूद हाजिर नहीं होता है या जांच में सहयोग नहीं करता है, तो पुलिस कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकती है. केवल नोटिस नहीं मानने से हर मामले में तुरंत गिरफ्तारी हो, ऐसा जरूरी नहीं है. गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई मामले की परिस्थितियों और कानून में तय प्रक्रिया के अनुसार होती है.
फरार होने पर क्या होगा
अगर मामला अदालत तक पहुंचता है और आरोपी अदालत के समन या वारंट के बावजूद हाजिर नहीं होता है, तो अदालत उसके खिलाफ आगे की प्रक्रिया शुरू कर सकती है. परिस्थितियों के अनुसार पहले वारंट जारी हो सकता है. अगर आरोपी लगातार फरार रहता है या खुद को गिरफ्तारी से बचाने के लिए छिपा रहा है, तो अदालत कानून में तय प्रक्रिया के तहत उसके खिलाफ उद्घोषणा जारी कर सकती है. इसके बाद भी वह निर्धारित समय पर अदालत में हाजिर नहीं होता है तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई हो सकती है. कुछ परिस्थितियों में उसकी संपत्ति कुर्क करने का आदेश भी अदालत दे सकती है.
मोहन तिवारी बताते हैं कि अगर शादी के सिर्फ 2 महीने बाद ही रिश्ता टूटने की स्थिति आ रहा है तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. लोगों में एक-दूसरे को समझने और रिश्ते को समय देने की कमी भी एक वजह हो सकती है. कई बार पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ जाता है और मामला हाथापाई तक पहुंच जाता है. इस तरह विवाद बढ़ने के बाद मामला पुलिस और फिर अदालत तक पहुंच जाता है. इसलिए नोटिस मिलने के बाद आरोपी के लिए जांच में शामिल होना और अदालत की प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होता है.

