Enable MDR on UPI: केंद्र सरकार यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन करने पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को फिर से लागू करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए सरकार ने सोमावार को पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है। इसका मकसद ‘UPI के अगले चरण के विस्तार के लिए फंड जुटाना’ है।
इस संशोधन के बाद सेक्शन 10ए के तहत लागू जीरो एमडीआर का प्रवाधान खत्म हो जाएगा और मंत्रालय UPI ट्रांजैक्शन पर फिर से MDR शुल्क लगा सकेगा। सेक्शन 10ए के तहत बैंक और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर (PSP) ऑनलाइन पेमेंट पर कोई शुल्क नहीं लगाया जा सकता है।
क्या है मर्चेंट डिस्काउंट रेट?
एमडीआर वह शुल्क है, जिसे कोई कारोबारी ग्राहकों के ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के बदले बैंक या पीएसपी को भुगतान करता है। डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए साल 2020 से ही यूपीआई और रुपे क्रेडिट कार्ड से ट्रांजैक्शन पर यह शुल्क जीरो है। इसकी दरें आरबीआई नियंत्रित करता है।
आसान भाषा में समझें
अगर कोई ग्राहक 1,000 रुपये का भुगतान क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड से करता है, तो कारोबारी को पूरी राशि नहीं मिलती। उसमें से एक छोटा हिस्सा MDR के रूप में कट जाता है और यह राशि संबंधित बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच बांट दी जाती है। हालांकि, जनवरी 2020 से सरकार ने UPI और रुपे डेबिट कार्ड लेनदेन पर जीरो MDR लागू कर दिया था। इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना था। इसके बाद से UPI के जरिए भुगतान करने पर कारोबारी को पूरी राशि मिलती रही है।
ग्राहकों पर क्या होगा असर
प्रस्तावित संशोधन में UPI का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों पर कोई अतिरिक्त शुल्क लगाने की बात नहीं कही गई है। यानी यदि कोई ग्राहक UPI से भुगतान करता है, तो उसे फिलहाल किसी तरह का अतिरिक्त चार्ज नहीं देना पड़ेगा। MDR का बोझ कारोबारियों पर पड़ने की संभावना है। हालांकि, अंतिम फैसला संशोधन विधेयक के पारित होने और सरकार की अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगा।

