तेल की कीमतों का बढ़ता बोझ सरकार और कंपनियां संभाल रहीं जबकि गैस की कीमतों का कुछ बोझ उपभोक्ताओं पर डाला
West Asia Crisis (द भारत ख़बर), मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक(आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी मौजूदा संकट जल्द से जल्द खत्म करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस संकट से न केवल पश्चिम एशिया में तेल व गैस उत्पादन पर गंभीर असर पड़ रहा है बल्कि विश्व के लिए सबसे अहम समुद्री मार्क होर्मुज जलडमरूमध्य भी पिछले करीब डेढ माह से बाधित है। इससे विश्व में जरूरी वस्तुओं की सप्लाई बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। इसका असर भारत पर भी काफी ज्यादा पड़ा है।
जरूरत का आधे से ज्यादा कच्चा तेल इसी क्षेत्र से आता है
उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र भारत के लिए बहुत अहम है, क्योंकि यहां से लगभग आधा कच्चा तेल आयात होता है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध और पश्चिम एशिया तनाव के चलते यह काफी ज्यादा प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा, संकट के बीच भारत अपने देश में तेल और गैस का उत्पादन बढ़ा रहा है।
साथ ही आयात के स्रोत भी अलग-अलग देशों से लिए जा रहे हैं, ताकि निर्भरता कम हो। गवर्नर ने कहा, तेल की कोई कमी नहीं है, क्योंकि हमारे पास पर्याप्त भंडार हैं। लेकिन औद्योगिक उपयोग के लिए गैस का सीमित वितरण किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि तेल की कीमतों का कुछ बोझ सरकार और तेल कंपनियों ने संभाला है। लेकिन गैस की कीमतों का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं पर डाला गया है।
विश्व से ज्यादा रही भारत की विकास दर
संजय मल्होत्रा ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारत की औसत आर्थिक वृद्धि 6.1 फीसदी रही है। जबकि वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 3.2 फीसदी रही। उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि चीन की वृद्धि 5.6 फीसदी और इंडोनेशिया की 4.2 फीसदी रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती मजबूत नीतियों और भरोसेमंद संस्थानों का परिणाम है। मल्होत्रा ने कहा, पश्चिम एशिया संकट का असर भारत पर इसलिए अधिक है, क्योंकि यह क्षेत्र भारत के निर्यात, आयात, उर्वरक और विदेशी धन प्रवाह का बड़ा हिस्सा है।
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