एक ही माह में दोगुना से भी ज्यादा हुआ थोक मूल्य सूचकांक
Wholesale Inflation Rate (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : पश्चिम एशिया तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के बाद पैदा हुई स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। कई देशों में जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति मांग की अपेक्षा काफी कम है। इसके आने वाले दिनों में और भी ज्यादा गहराने का डर बना हुआ है। भारत भी उन्हीं देशों में शामिल है जो इस स्थिति का सामना कर रहे हैं।
इसी बीच गत दिवस थोक मूल्य सूचकांक के आंकड़ों ने सभी को चौंका दिया है। वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल महीने में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित महंगाई दर में भारी उछाल दर्ज किया गया है। मजबूत डॉलर और ऊर्जा की ऊंची कीमतों के बीच मुद्रास्फीति की चिंताओं के कारण गुरुवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले और कमजोर होकर 95.73 (अस्थायी) के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया।
मार्च के बाद एकदम से बड़ी थोक महंगाई दर
मार्च महीने में थोक महंगाई दर 3.88 प्रतिशत के स्तर पर थी, जो अप्रैल में तेजी से बढ़कर 8.30 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इस जबरदस्त वृद्धि के पीछे मुख्य कारण ईंधन, बिजली और कच्चे पेट्रोलियम की कीमतों में आई बेतहाशा तेजी है। मंत्रालय के बयान के अनुसार, अप्रैल 2026 में महंगाई की यह सकारात्मक दर मुख्य रूप से खनिज तेलों, कच्चे पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, बुनियादी धातुओं, अन्य विनिर्माण और गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण है।
वैश्विक संकट और आपूर्ति शृंखला में बाधा
थोक महंगाई में आया यह तेज उछाल सीधे तौर पर पश्चिम एशिया में चल रहे संकट को दशार्ता है। इसके साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य की प्रभावी नाकेबंदी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। यह जलमार्ग भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अपने आयातित कच्चे तेल का अधिकांश हिस्सा इसी मार्ग से प्राप्त करता है। ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में महंगाई की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक रही है।
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