Birbhum Cash Recovery News: पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में पुलिस ने एक पूर्व बस ड्राइवर के यहां छापेमारी की। जब पुलिस वहां पहुंची, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि वहां से 28.5 करोड़ रुपये नकद और करीब 15 किलो सोना बरामद होगा। नोटों की गड्डियां इतनी ज्यादा थीं कि उन्हें गिनने के लिए लाई गई पांच करेंसी काउंटिंग मशीनें भी खराब हो गईं। अब यह मामला केवल अवैध संपत्ति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके तार पत्थर कारोबार, टैक्स घोटाले और पूर्व टीएमसी नेता से जुड़े नेटवर्क तक पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस और जांच एजेंसियां अब इस पूरे मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी हैं।
कैसे हुआ करोड़ों के खजाने का खुलासा?
पूरा मामला बीरभूम जिले के मोहम्मदबाजार इलाके का है। पुलिस ने पहले डकैती के एक मामले में 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान मिले अहम इनपुट के आधार पर पुलिस ने देर रात मिनार मंडल के घर पर छापा मारा। शुरुआत में अधिकारियों को कुछ बक्सों में बड़ी मात्रा में नकदी मिली, लेकिन जैसे-जैसे तलाशी आगे बढ़ी, मामला और चौंकाने वाला होता गया। घर में रखे छह बड़े ट्रंक और दो अलमारियों से नोटों के बंडल निकलते गए। पूरी रात चली गिनती के बाद बरामद नकदी ₹28.50 करोड़ तक पहुंच गई। इसके साथ ही पुलिस ने 15 किलो सोना भी बरामद किया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब ₹21.5 करोड़ बताई जा रही है। इस तरह कुल बरामदगी लगभग ₹50 करोड़ के आसपास पहुंच गई।
नोट गिनते-गिनते खराब हो गईं 5 मशीनें
बरामद नकदी इतनी अधिक थी कि पुलिस को कई करेंसी काउंटिंग मशीनों की मदद लेनी पड़ी। अधिकारियों के अनुसार लगातार नोट गिनने के दौरान पांच करेंसी काउंटिंग मशीनें खराब हो गईं। इसके बाद नकदी और सोने को सुरक्षा के बीच लोहे के ट्रंकों में भरकर सरकारी ट्रेजरी भेजा गया। पुलिस ने आरोपी के घर को सील कर दिया है ताकि जांच के दौरान कोई सबूत प्रभावित न हो।
TMC backed stone smuggler Tulu Mondal (Md Nizabuddin) is found storing 15 kgs of Gold and 5.5 crs cash. pic.twitter.com/uarKbhmWgH
— Avinash K S🇮🇳 (@AvinashKS14) July 29, 2026
आखिर कौन है मिनार मंडल?
स्थानीय लोगों के मुताबिक मिनार मंडल कुछ साल पहले तक उत्तर बंगाल राज्य परिवहन निगम में बस चालक था। करीब 4 साल पहले उसने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ली और बाद में पत्थर कारोबारी तुलु मंडल यानी मोहम्मद नजीबुद्दीन के कारोबार से जुड़ गया। धीरे-धीरे वह तुलु मंडल का भरोसेमंद मैनेजर बन गया और रायपुर क्षेत्र में डीसीआर से जुड़े कामकाज की जिम्मेदारी संभालने लगा। इलाके में उसकी छवि एक सामान्य कर्मचारी की थी, इसलिए उसके घर से इतनी बड़ी बरामदगी ने सभी को हैरान कर दिया।
तुलु मंडल कौन है और चर्चा में क्यों?
जांच एजेंसियों के अनुसार फरार पत्थर कारोबारी तुलु मंडल इस पूरे मामले का मुख्य किरदार माना जा रहा है। पुलिस का दावा है कि पूछताछ में मिनार मंडल ने बताया कि बरामद नकदी और सोना तुलु मंडल का है। तुलु मंडल का नाम पहले भी कई मामलों में सामने आ चुका है। वर्ष 2022 में सीबीआई ने पशु तस्करी मामले में उसके ठिकानों पर छापेमारी की थी। बाद में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने भी उसे पूछताछ के लिए तलब किया था। तुलु मंडल पहले भी तब चर्चा में आया था, जब 2024 में उसने अपनी बेटी की करीब ₹100 करोड़ की आलीशान शादी आयोजित की थी। उस शादी के खर्च को लेकर पूरे राज्य में चर्चा हुई थी।
पूर्व TMC नेता से जुड़े होने की चर्चा
राजनीतिक हलकों में इस मामले की चर्चा इसलिए भी तेज हो गई है, क्योंकि तुलु मंडल को पूर्व टीएमसी नेता अनुब्रत मंडल का करीबी माना जाता रहा है। हाल के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद यह मामला और अधिक सुर्खियों में आ गया है। जांच एजेंसियां फिलहाल केवल उपलब्ध सबूतों के आधार पर आगे की जांच कर रही हैं। गिरफ्तार मिनार मंडल के बेटे ने दावा किया है कि बरामद नकदी और सोना उनके परिवार का नहीं है। उसके अनुसार यह सामान तुलु मंडल ने उनके घर पर रखवाया था और परिवार को इसकी वास्तविक जानकारी नहीं थी। वहीं पुलिस इस दावे की भी जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि करोड़ों रुपये और सोना घर तक कैसे पहुंचा और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

