Infosis stay away from data centre Business: AI के बढ़ते प्रभाव की वजह से दुनियाभर की दिग्गज टेक कंपनियां डेटा सेंटर बिजनेस में दांव आजमाने की तैयारी कर रही है। ऐसे में भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी इन्फोसिस का इस सेक्टर में नहीं उतरने का फैसला थोड़ा चौंकाने वाला है। दरअसल, इन्फोसिस ने ज्यादा निवेश वाले डेटा सेंटर बिज़नेस में नहीं उतरने का फैसला नहीं किया है। इसके बजाय, कंपनी अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रणनीति को एंटरप्राइज सर्विसेज़, छोटे स्पेशलाइज़्ड मॉडल और ग्लोबल AI कंपनियों के साथ पार्टनरशिप पर केंद्रित कर रही है।
‘महंगा है यह बिजनेस’
इन्फोसिस के निवर्तमान CEO सलिल पारेख ने कहा कि कंपनी ने डेटा सेंटर के क्षेत्र में उतरने पर विचार किया था, लेकिन यह निष्कर्ष निकाला कि इसके लिए जरूरी निवेश न तो कंपनी की बैलेंस शीट के अनुकूल होगा और न ही इससे पर्याप्त लाभ मिलेगा।
‘बैलेंस शीट में फिट नहीं’
पारेख ने सीएनबीसी को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ”हमने इस पर विचार किया है और हम डेटा सेंटर बिजनेस में उतरने की योजना नहीं बना रहे हैं।” उन्होंने कहा,”हमने अपने नजरिए से अपनी बैलेंस शीट, बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर बनाने के लिए जरूरी संभावित कैश और दूसरी जरूरतों पर विचार किया है।”
जांच के बाद हुआ फैसला
उन्होंने कहा, ”हमने इस स्टेज पर तय किया है कि इससे हमें कोई फायदा नहीं होगा, खासकर हमारी बैलेंस शीट को देखते हुए, क्योंकि इसके लिए बहुत ज्यादा कैश की जरूरत पड़ सकती है।” पारेख ने बताया कि इन्फोसिस द्वारा इस प्रस्ताव को ठुकराने से पहले मैनेजमेंट और बोर्ड, दोनों ने इसकी जांच की थी।
TCS से अलग खड़ी हुई इन्फोसिस
इस फैसले ने इन्फोसिस को उसकी बड़ी प्रतिद्वंद्वी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से अलग खड़ा कर दिया है, जो AI वैल्यू चेन में खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रही है।
टीसीएस ने हाइपरवॉल्ट नामक एक एआई-रेडी डेटा सेंटर व्यवसाय शुरू किया है, जिसका लक्ष्य भारत में एक गीगावाट से अधिक क्षमता स्थापित करना है। निजी इक्विटी फर्म टीपीजी ने इस उद्यम में 1 बिलियन डॉलर तक का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है।

