Centre on ethenol: केंद्र सरकार ने अपने एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का बचाव किया है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि अगर पेट्रोल में एथेनॉल न मिलाया जाता, तो वैश्विक संकट के दौरान कच्चे तेल की कीमत 135 डॉलर प्रति बैरल होने पर पेट्रोल 125 रुपये प्रति लीटर तक बिक सकता था, जबकि लोगों ने इसे 94.77 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा।
‘एथेनॉल से लोगों को फायदा हुआ’
मंत्रालय के मुताबिक, घरेलू स्तर पर पूर्व-निर्धारित दरों पर खरीदे गए एथेनॉल के 20% मिश्रण (E20) की वजह से ग्राहकों को उस संकट के चरम समय में भी 94.77 रुपये प्रति लीटर ही भुगतान करना पड़ा। इस तरह एथेनॉल ब्लेंडिंग ने आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल पर प्रति लीटर लगभग 30 रुपये की सीधी बचत कराई।
’75 दिनों तक कीमतें स्थिर रहीं’
सरकार ने बताया कि 28 फरवरी को ईरान और अमेरिका के बीच पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद करीब 75 दिनों तक पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रखी गई थीं। इसके बाद मई में इसमें 7.5 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी।
वर्तमान में पेट्रोल की कीमत
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मानक E20 पेट्रोल (91-ऑक्टेन) 102.12 रुपये प्रति लीटर, जबकि 100-ऑक्टेन प्रीमियम पेट्रोल 169 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहे हैं।
‘माइलेज में 2-5% की कमी’
सड़क परिवहन मंत्रालय ने लोकसभा में बताया कि E10 ईंधन के लिए डिजाइन किए गए बीएस-3, बीएस-4 और बीएस-6 वाहनों में E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर उनकी ईंधन दक्षता में वाहन श्रेणी व उम्र के आधार पर 2% से 6% तक की कमी आ सकती है। इससे पहले 20 जुलाई को राज्यसभा में पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा था कि ऐसे वाहनों के माइलेज में गिरावट केवल 3% से 5% तक ही सीमित है।

