नई दिल्ली. क्रिकेट की दुनिया में अपना दम दिखाकर लाखों को दीवाना बनाने वाले ऐसे कई भारतीय क्रिकेट हैं जिनकी राजनीतिक पारी भी सफल रही. विरोधी टीमों के खिलाफ मैदान पर बल्ले और गेंद से दिग्गजों ने देश के लिए जीत का कहानी लिखी. कई ऐसे स्टार खिलाड़ी हुए हैं जिन्होंने क्रिकेट छोड़कर राजनीति की पिच पर अपनी किस्मत आजमाने का फैसला लिया और सफल भी हुए. कई ऐसे खिलाड़ी हैं जिनको जनता का प्यार मिला और वो चुनाव जीतकर संसद बने जबकि कुछ के लिए अनुभव कड़वा रहा.
भारत के लिए सबसे पहली आईसीसी ट्रॉफी जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे कीर्ति आजाद का राजनीतिक सफर भी क्रिकेट की तरह कामयाब रहा. कपिल देव की कप्तानी में भारतीय टीम ने साल 1983 विश्व कप का खिताब जीता था. टीम को चैंपियन बनाने में कीर्ति आजाद की अहम भूमिका थी. क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद इस चैंपियन खिलाड़ी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) से राजनीति की दुनिया में कदम रखा. दिल्ली के गोल मार्केट से विधायक बने फिर सांसद भी चुने गए. बीजेपी ने 23 दिसंबर 2015 को सांसद कीर्ति आजाद को पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निलंबित कर दिया. इस समय कीर्ति तृणमूल कांग्रेस के सांसद हैं.
भारतीय क्रिकेट टीम के महानतम कप्तानों में शामिल मोहम्मद अजहरुद्दीन ने भी क्रिकेट से राजनीति में कदम रखा. साल 2009 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा. उनको जनता का प्यार मिला और वो चुनाव जीतकर संसद पहुंचे. उनको पार्टी ने तेलंगाना कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी दी थी.
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ओपनर नवजोत सिंह सिद्धू जिनको उनकी बल्लेबाजी और हाजिर जबावी के लिए जाना जाता है. उन्होंने साल 2004 में भारतीय जनता पार्टी भाजपा की सदस्यता लेकर राजनीति में कदम रखा. पार्टी से उनका रिश्ता कुछ अच्छा नहीं रहा और आपसी अनबन के बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया. नवजोत को इसका फायदा भी मिला और वो पंजाब सरकार में पर्यटन एवं स्थानीय निकाय मंत्री भी बने.
भारतीय क्रिकेट टीम का एक ऐसा बल्लेबाज जिसका करियर लंबा हो सकता था लेकिन गलत समय पर चोट ने उनके सपनों पर पानी फेर दिया. टीम इंडिया के लिए अपने आखिरी मैच में शतक जमाने के बाद भी बाहर कर दिए गए. साल 2021 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने मनोज तिवारी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उनको टिकट दिया और जनता ने उन्होंने प्यार देकर विजेता बनाया. चुनाव में जीत मिलने के बाद मनोज तिवारी को राज्य सरकार में खेल एवं युवा मामलों का राज्यमंत्री बनाया गया.
भारतीय क्रिकेट टीम में विस्फोटक ऑलराउंडर के तौर पर अपना पहचान बनाने वाले यूसुफ पठान ने जब राजनीति में कदम रखा तो लोगों को हैरान कर दिया. भारत केलिए टी20 और वनडे दोनों ही वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे इस खिलाड़ी को तृणमूल कांग्रेस ने राजनीति में आने का मंच दिया. पूर्व क्रिकेटर ने 2024 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल की बहरामपुर सीट से चुनाव लड़ा और कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी को हराया.
पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह के चहेते खिलाड़ियों में शामिल रहे केदार जाधव ने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली. उन्होंने राजनीति में कदम रखा और जनता के बीच जाकर काम करते भी नजर आए हैं. उनको कई बार अपनी स्थानीय जनता से बात करते देखा गया है. वो आस पास के लोगों की शिकायतों को सुनते हैं और इसका निपटारा करने की कोशिश करते हैं.
भारतीय टीम के पूर्व कप्तान और मौजूदा मुख्य कोच गौतम गंभीर ने भी क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद राजनिती में कदम रखा था. साल 2019 में वो भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे. उनको पूर्वी दिल्ली की जनता ने भरपूर प्यार लिया और लोगसभा चुनाव में जीत दिलाकर सांसद बनाया. हालांकि 5 साल तक जनता की सेवा करने के बाद उन्होंने राजनीति से ब्रेक लेने का फैसला लिया.

