चंडीगढ़: सिख विरोधी दंगों के दोषी दिवंगत कांग्रेस नेता सज्जन कुमार से जुड़े एक कथित बयान को लेकर हरियाणा कांग्रेस में सियासी भूचाल आ गया है. इस मुद्दे पर कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के निशाने पर आ गए हैं. हरियाणा विधानसभा के पूर्व स्पीकर और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कुलदीप शर्मा ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर दीपेंद्र हुड्डा के खिलाफ सीधी कार्रवाई की मांग की है. वहीं, विवाद बढ़ता देख दीपेंद्र हुड्डा ने सोशल मीडिया पर सफाई देते हुए सिख समाज से माफी मांगी है.
इस पूरे प्रकरण में हुड्डा ने एक्स पर लिखा, ‘पिछले दो दिन से मैं देख रहा हूं कि मेरे बयान को घुमा-फिराकर लोगों के सामने पेश किया जा रहा है. और मेरे बयान में एक ऐसा भी अंग्रेजी का शब्द डाला जा रहा है, जो मैंने बोला ही नहीं, न ही मेरा दूर-दूर तक ऐसा कोई मतलब था. मेरी कोई भी मंशा किसी हमारे भाई को ठेस पहुंचाने की नहीं थी. सिख समाज के हमारे भाईयों को तो ठेस पहुंचाने की मैं सोच भी नहीं सकता। ना मेरी कभी कोई भावना ऐसी थी. लेकिन फिर भी सिख समाज हमारा अपना परिवार है. अगर किसी भाई की भावनाओं को ठेस लगी है तो मैं आपका भाई हूं, मैं खेद प्रकट करता हूं. मेरी मंशा, मेरा मकसद किसी का दिल दुखी करना नहीं था.’
उधर, इस पूरे मामले पर हरियाणा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखे पत्र में कड़ा रुख अपनाते हुए दीपेंद्र हुड्डा को कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) से तत्काल हटाने की मांग की है. कुलदीप शर्मा ने पत्र में लिखा है-
दीपेंद्र हुड्डा द्वारा सज्जन कुमार की प्रशंसा करने और उन्हें ‘रोल मॉडल’ जैसा बताने वाले कथित बयान से देशभर के सिख समाज में गहरा रोष और सदमा है. उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के बाद सिख समुदाय ने मजबूती से कांग्रेस का साथ दिया था, लेकिन इस गैर-जिम्मेदाराना बयान से समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं और विपक्षी दल इसका राजनीतिक फायदा उठा रहे हैं. शर्मा ने तर्क दिया कि सिख समाज के जख्मों पर मरहम लगाने और पार्टी की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए दीपेंद्र हुड्डा को CWC से हटाया जाना बेहद जरूरी है.
कुलदीप शर्मा द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को लिखा गया पत्र.
बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया – दीपेंद्र हुड्डा
मामले के तूल पकड़ने पर रोहतक से सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने एक्स पर पोस्ट कर सफाई दी. हुड्डा ने लिखा, ‘पिछले दो दिन से मैं देख रहा हूं कि मेरे बयान को घुमा-फिराकर लोगों के सामने पेश किया जा रहा है. मेरे बयान में एक ऐसा अंग्रेजी शब्द जोड़ा जा रहा है, जो मैंने कभी बोला ही नहीं और न ही मेरा दूर-दूर तक ऐसा कोई मतलब था.’
दिल दुखाना मेरा मकसद नहीं था
दीपेंद्र हुड्डा ने सिख समाज के प्रति अपनी भावनाएं जाहिर करते हुए लिखा:
‘सिख समाज हमारा अपना परिवार है. अगर किसी भाई की भावनाओं को ठेस लगी है, तो मैं आपका भाई हूँ और मैं खेद प्रकट करता हूँ. मेरी मंशा किसी का दिल दुखाने की कतई नहीं थी.’
परदादा के इतिहास का दिया हवाला
दीपेंद्र हुड्डा ने सिख समुदाय के साथ अपने पारिवारिक रिश्तों का उल्लेख करते हुए बताया कि 1908 के ‘पगड़ी संभाल जट्टा’ आंदोलन में शहीद भगत सिंह के चाचा सरदार अजीत सिंह के साथ उनके परदादा चौधरी मातूराम को भी काले पानी की सजा हुई थी. उन्होंने याद दिलाया कि किसान आंदोलन के दौरान भी वह सबसे पहले सिख किसान भाइयों के साथ खड़े रहे थे.
