अंबाला: रक्षाबंधन और आने वाले त्योहार सीजन से पहले मिठाई बाजार में महंगाई का असर साफ दिखाई देने लगा है. दरअसल चीनी, घी और ड्राई फ्रूट के दाम बढ़ने से मिठाई बनाने की लागत बढ़ गई है. कारोबारियों का कहना है कि बाजार में महंगे कच्चे माल के कारण मिठाई के दाम बढ़ाना मजबूरी हो गई है, जबकि ग्राहक अब एक किलो की जगह आधा किलो मिठाई खरीद रहे हैं. वहीं चीनी कारोबारियों के मुताबिक, महंगाई की चर्चा के चलते जरूरत से ज्यादा स्टॉक किए जाने से भी बाजार में दबाव बढ़ा है.
बता दें कि रक्षाबंधन से त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है और इसी के साथ बाजारों में मिठाई, ड्राई फ्रूट और अन्य खाद्य सामग्री की मांग बढ़ने लगी है. लेकिन इस बार त्योहारों की मिठास पर महंगाई का असर भारी पड़ रहा है और चीनी के अलावा काजू, बादाम, किशमिश, पिस्ता और घी की कीमतों में तेजी ने दुकानदारों के साथ-साथ आम ग्राहकों का बजट भी बिगाड़ दिया है.
पहले कभी नहीं बढ़े चीनी के इतने दाम
वहीं इस बारे में लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए चीनी कारोबार से जुड़े विकास ने बताया कि वह करीब 25 साल से चीनी उद्योग से जुड़े हैं. उनका कहना है कि इतनी तेजी उन्होंने पहले कभी नहीं देखी है. उनके मुताबिक चीनी का थोक भाव करीब 65 रुपये किलो तक पहुंच गया है. जिस चीनी का ट्रक पहले लगभग 15 लाख रुपये में आता था, अब उसकी कीमत 22 से 30 लाख रुपये तक पहुंच रही है. उन्होंने बताया कि चीनी के दाम बढ़ने की एक बड़ी वजह बाजार में बनी महंगाई की धारणा भी है. जैसे ही लोगों के बीच यह चर्चा चली कि चीनी और महंगी होने वाली है, लोगों ने जरूरत से ज्यादा खरीदारी शुरू कर दी थी. जिन लोगों को 5 किलो चीनी की जरूरत थी, उन्होंने 50 किलो तक खरीदकर रख ली. इससे बाजार में मांग अचानक बढ़ी और कीमतों पर दबाव आया.
गुणवत्ता और उत्पादन में कमी
उन्होंने चीनी की कीमत बढ़ने के पीछे गन्ने की गुणवत्ता और उत्पादन में कमी को भी वजह बताया. उनका कहना है कि इस बार गन्ने से रस कम निकलने के कारण चीनी का उत्पादन प्रभावित हुआ है. उन्होंने कहा कि चीनी के दाम बढ़ने के बीच बाजार में एथेनॉल उत्पादन को भी इसकी वजह बताया जा रहा है. हालांकि विकास का कहना है कि चीनी से एथेनॉल बनाए जाने की बात सही नहीं है. उनके मुताबिक, एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के रस और उससे जुड़े उत्पादों का इस्तेमाल होता है. उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में चीनी के दाम में कुछ कमी आ सकती है.
ड्राई फ्रूट के भी बढ़े दाम
वही चीनी के साथ ड्राई फ्रूट बाजार भी महंगाई से अछूता नहीं है. कारोबारियों के मुताबिक, रक्षाबंधन के चलते ड्राई फ्रूट की मांग बढ़ी है. बादाम गिरी के दाम में करीब 100 से 150 रुपये प्रति किलो तक की तेजी देखने को मिल रही है. सप्लाई प्रभावित होने और लागत बढ़ने का असर भी कीमतों पर पड़ा है और अगर तेजी का सिलसिला जारी रहा तो आने वाले समय में बादाम गिरी की कीमत 1,250 रुपये किलो तक पहुंच सकती है.
उन्होंने कहा कि काजू, किशमिश और पिस्ता के दाम में भी बढ़ोतरी का असर देखने को मिल रहा है. वहीं घी और रिफाइंड की कीमतों में तेजी ने मिठाई कारोबारियों की चिंता और बढ़ा दी है. कारोबारियों के मुताबिक, घी और रिफाइंड के दाम में करीब 500 रुपये तक की तेजी देखने को मिली है. पैकिंग की लागत बढ़ने से भी कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है.
मिठाई के दाम बढ़ाना मजबूरी
वहीं मिठाई विक्रेता गुरमीत सिंह बताते हैं कि चीनी, घी और ड्राई फ्रूट महंगे होने के कारण मिठाई की लागत लगातार बढ़ रही है. उनका कहना है कि पहले जो ग्राहक एक किलो मिठाई खरीदता था, अब वही इस बार आधा किलो खरीदकर काम चला रहा है. ऐसे में उनके लिए मिठाई के दाम बढ़ाना मजबूरी है, लेकिन कीमत बढ़ने से बिक्री भी प्रभावित हो रही है. वहीं महंगाई का असर बाजार से निकलकर सीधे लोगों के घर के बजट तक पहुंच गया है. ऐसे में रमेश मल्होत्रा ने कहा कि आमदनी में खास बढ़ोतरी नहीं हुई, लेकिन रोजमर्रा की वस्तुएं लगातार महंगी हो रही हैं. ऐसे में त्योहार पर मिठाई और दूसरी जरूरी चीजें खरीदना मुश्किल होता जा रहा है.
उन्होंने सरकार से बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण की मांग की. वहीं मजदूरी करने वाले सुखविंदर सिंह का कहना है कि महंगाई के कारण रोजमर्रा की चीजें खरीदना मुश्किल हो गया है. उनका कहना है कि रक्षाबंधन और त्योहारों के बीच हर चीज महंगी हो रही है, जबकि उनकी आमदनी में कोई बदलाव नहीं आया. ऐसे में इस बार त्योहार पर मिठाई खरीदना भी मुश्किल लग रहा है.

