नई दिल्ली. आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन अगले साल श्रीलंका में किया जाना है. इसकी मेजबानी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. फरवरी 2027 में होने वाली पहली महिला चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी गंवानी पड़ सकती है. क्रिकइंफो की रिपोर्ट के मुताबिक श्रीलंका क्रिकेट (SLC) के प्रशासन में लगातार हो रहे राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ता जा रहा है. इसी वजह से इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल श्रीलंका से टूर्नामेंट की मेजबानी वापस ले सकता है. अगर ऐसा होता है तो इस टूर्नामेंट को भारत में कराया जा सकता है.
श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड के आईसीसी एक बार सस्पेंड कर चुका है और अब फिर से उनके ऊपर ऐसा ही खतरा मंडरा रहा है. आईसीसी की नीति इस बात को लेकर हमेशा से ही साफ रही है कि सदस्य देशों के क्रिकेट प्रशासन में सरकारी या राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए. इस बात से आईसीसी किस कदर नाराज है ये हालिया मीटिंग में पता चल गया. बोर्ड बैठकों से श्रीलंका क्रिकेट के प्रतिनिधियों को भी बाहर रखा गया था. श्रीलंकाई सरकार ने चुने हुए क्रिकेट बोर्ड को हटाकर संवैधानिक और प्रशासनिक बदलावों की निगरानी के लिए एक राजनीतिक ‘ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी’ नियुक्त कर दी है. ये आईसीसी के नियमों के खिलाफ है.
इन सबको देखते हुए ऐसा तय माना जा रहा है कि श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड से महिला चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी छिन सकती है. ऐसी स्थिति में टूर्नामेंट को तय समय पर कराने के लिए इसकी मेजबानी को बीसीसीआई को दिया जा सकता है. रिपोर्ट के अनुसार भारत इस टूर्नामेंट की मेजबानी का प्रबल दावेदार है. आईसीसी की अक्टूबर में होने वाली आगामी बोर्ड बैठक में नए मेजबान देश की आधिकारिक घोषणा होने की उम्मीद है.
आईसीसी महिला चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी अगर श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड के हाथ से गई तो उसे नुकसान होगा. अगर इस मेगा टूर्नामेंट की मेजबानी बोर्ड के हाथ से गई तो सबसे बड़ा असर श्रीलंका की टीम पर पड़ेगा. छह टीमों को टूर्नामेंट में मेजबान होने की वजह से जगह मिली थी. बाकी पांच टीमों का फैसला आईसीसी की रैंकिंग से हुआ था. इस समय श्रीलंका सातवें नंबर पर है और उससे मेजबानी छिनी तो वो बाहर हो जाएगा. ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, भारत, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका उससे ऊपर हैं. वेस्टइंडीज छठे स्थान पर है और वो श्रीलंका को बाहर कर टूर्नामेंट में शामिल हो जाएगा.

