GST Council Clears Major Relief Measures: गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स (GST) व्यवस्था को ज्यादा सरल, पारदर्शी और कारोबारियों के अनुकूल बनाने की दिशा में जीएसटी परिषद ने कई अहम सुधारों की सिफारिश की है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई 57वीं बैठक में जीएसटी के तहत गिरफ्तारी संबंधी प्रावधान हटाने, अभियोजन की मौद्रिक सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने, सामान्य जुर्माने की अधिकतम सीमा घटाने और रिफंड प्रक्रिया को स्वचालित बनाने जैसे महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में जीएसटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया। केंद्र सरकार के अनुसार इन सुधारों का उद्देश्य टैक्सपेयर्स को राहत देना है। अधिकांश बदलाव एक अप्रैल 2027 से लागू करने की योजना है।
गिरफ्तारी का प्रावधान हटाने की सिफारिश
जीएसटी परिषद ने केंद्रीय जीएसटी (CGST) अधिनियम की धारा 69 को हटाने की सिफारिश की है। इस धारा के तहत कुछ परिस्थितियों में GST अधिकारियों को गिरफ्तारी की शक्ति प्राप्त है। प्रस्तावित बदलाव लागू होने पर जीएसटी कानून के तहत अधिकारियों की गिरफ्तारी संबंधी शक्ति समाप्त हो जाएगी। इसे करदाताओं और कारोबारियों को बड़ी राहत देने वाला कदम माना जा रहा है। परिषद ने जीएसटी से जुड़े मामलों में अभियोजन की मौद्रिक सीमा भी एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने की सिफारिश की है। कुछ अपराधों की परिभाषा और दंड संबंधी प्रावधानों को तर्कसंगत बनाने का प्रस्ताव है।
सामान्य जुर्माने की सीमा अब 10 हजार रुपये
जीएसटी काउंसिल ने सामान्य जुर्माने की अधिकतम सीमा 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये करने की सिफारिश की है। इसके अलावा टैक्स संबंधी छोटे मामलों में नोटिस जारी करने के लिए न्यूनतम 10,000 रुपये की सीमा निर्धारित करने का प्रस्ताव है। इसमें सीजीएसटी, एसजीएसटी, आईजीएसटी और उपकर की संबंधित राशि को शामिल किया जाएगा। निर्धारित सीमा से कम राशि वाले मामलों में नोटिस जारी नहीं किए जाएंगे। ऐसे लंबित नोटिसों और अपीलों के निपटारे के लिए भी संबंधित वैधानिक प्रावधानों में बदलाव की सिफारिश की गई है। परिषद ने गैर-धोखाधड़ी वाले मामलों में न्यूनतम जुर्माने की अनिवार्यता समाप्त करने की भी सिफारिश की है।
स्वचालित रिफंड से कारोबारियों को मिलेगी राहत
बैठक का एक प्रमुख फैसला जीएसटी रिफंड प्रक्रिया को तेज और अधिक स्वचालित बनाना है। परिषद ने इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में उपलब्ध अतिरिक्त राशि के रिफंड को बिना अधिकारी के हस्तक्षेप के सिस्टम के माध्यम से मंजूर करने की सिफारिश की है। इसके अलावा रिफंड आवेदन की प्राप्ति की पावती या कमी संबंधी सूचना जारी करने की समय-सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने का प्रस्ताव है। तय अवधि में सूचना जारी नहीं होने पर सिस्टम के माध्यम से आवेदन की पावती माने जाने का प्रावधान भी प्रस्तावित है।
इनपुट सेवाओं पर भी मिलेगा रिफंड का लाभ
उलट शुल्क ढांचे के तहत कारोबारियों को उस स्थिति में इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) जमा होने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है, जब इनपुट पर लगने वाली जीएसटी दर अंतिम उत्पाद पर लगने वाली दर से अधिक हो। परिषद ने इस समस्या के समाधान के लिए पात्र मामलों में इनपुट सेवाओं पर जमा आईटीसी के रिफंड का लाभ देने की सिफारिश की है।
छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं को भी राहत
जीएसटी काउंसिल ने छोटे विक्रेताओं के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आसान करने की सिफारिश की है। इसके तहत कुछ शर्तें पूरी करने वाले छोटे आपूर्तिकर्ता उन राज्यों में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से कारोबार कर सकेंगे, जहां उनका भौतिक व्यावसायिक प्रतिष्ठान नहीं है। प्रस्तावित व्यवस्था में संबंधित ई-कॉमर्स ऑपरेटर के गोदाम को मुख्य व्यवसाय स्थल के रूप में घोषित करने की सुविधा शामिल है। इससे छोटे विक्रेताओं को दूसरे राज्यों में कारोबार बढ़ाने के लिए हर जगह अलग व्यावसायिक प्रतिष्ठान स्थापित करने की जरूरत कम हो सकती है।

