Jamia Student Union Polls News: दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में करीब दो दशक बाद छात्रसंघ चुनाव बहाल होने की उम्मीद बढ़ गई है। छात्रसंघ चुनाव कराने और निर्वाचित छात्र प्रतिनिधित्व बहाल करने की मांग को लेकर लंबे समय से चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोमवार को महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। इसके मुताबिक छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। प्रशासन ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों को जारी किए गए निलंबन आदेश और कारण बताओ नोटिस भी वापस लेने का फैसला किया है। इसके अलावा प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाकर्मियों की कार्रवाई की जांच के लिए समिति गठित करने की बात कही गई है।
छात्रसंघ चुनाव पर बड़ा फैसला
जामिया मिल्लिया इस्लामिया के रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से 26 अक्टूबर को जारी आदेश में छात्रसंघ चुनाव कराने की समयसीमा को लेकर जानकारी दी गई। इसके अनुसार जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव आयोजित किए जाएंगे। इस घोषणा को छात्रों की लंबे समय से चली आ रही मांग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि प्रशासन के आदेश में संविधान को मंजूरी देने की निश्चित तारीख का उल्लेख नहीं है। ऐसे में चुनाव कब होंगे, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि छात्रसंघ का संविधान कब अंतिम रूप से मंजूर किया जाता है। छात्रों की ओर से भी इसी मुद्दे पर स्पष्ट समयसीमा और ठोस आश्वासन की मांग की गई है।
Jamia Millia Islamia announces resumption of student union elections after two decades. In an order issued on Monday, the university administration said the elections would be held within 15 days of the approval of the students’ union constitution.
“The Jamia Millia Islamia Students’ Union Election will be held after 15 days, from the date of approval of the constitution of the Students’ Union of Jamia Millia Islamia,” the order stated.
The announcement comes after days of protests by students, who have been demanding the restoration of the elected students’ union, which was dissolved by the university administration in 2006.
— ANI (@ANI) October 26, 2026
2006 के बाद नहीं हुए चुनाव
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ चुनाव का मुद्दा करीब 20 वर्षों से लंबित है। विश्वविद्यालय में वर्ष 2006 में छात्रसंघ भंग कर दिया गया था और उसके बाद से निर्वाचित छात्रसंघ के चुनाव नहीं हुए हैं। इसके बाद से छात्र समय-समय पर छात्रसंघ की बहाली और चुनाव कराने की मांग उठाते रहे हैं। छात्रों का कहना है कि निर्वाचित छात्रसंघ विश्वविद्यालय प्रशासन और विद्यार्थियों के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण माध्यम होता है। इसके जरिए छात्र अपनी शैक्षणिक समस्याओं, परिसर की सुविधाओं, प्रशासनिक फैसलों और अन्य मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सामने रख सकते हैं। इसी मांग को लेकर छात्रों ने आंदोलन तेज कर दिया था।
भूख हड़ताल-प्रदर्शन से बढ़ा दबाव
छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर जामिया में 12 अक्टूबर से विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था। आंदोलन के दौरान कुछ छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रसंघ चुनाव कराने के लिए स्पष्ट कार्यक्रम घोषित करे और निर्वाचित छात्र प्रतिनिधित्व बहाल करने की प्रक्रिया में तेजी लाए। प्रदर्शन के दौरान छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच कई बार तनाव की स्थिति बनी। छात्रों ने निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई का विरोध भी किया। इसी बीच 24 अक्टूबर को विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए अगले आदेश तक सभी पाठ्यक्रमों की ऑफलाइन कक्षाएं ऑनलाइन माध्यम से संचालित करने का फैसला किया। इस फैसले के बाद छात्रों का विरोध और तेज हो गया। 25 अक्टूबर को विश्वविद्यालय के गेट नंबर 7 के बाहर बड़ी संख्या में छात्र जुटे और ऑनलाइन कक्षाओं के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया।
छात्रों के निलंबन का नोटिस वापस
विश्वविद्यालय प्रशासन के नए आदेश में प्रदर्शन के दौरान छात्रों को जारी किए गए निलंबन आदेश और कारण बताओ नोटिस वापस लेने का फैसला भी शामिल है। इसके साथ ही आंदोलन के दौरान विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मियों की कार्रवाई की जांच के लिए समिति गठित करने की बात कही गई है। ये फैसले छात्रसंघ चुनाव की मांग के साथ उठाए गए अन्य मुद्दों पर भी प्रशासन की ओर से कार्रवाई के रूप में देखे जा रहे हैं। हालांक प्रशासन के आदेश में प्रदर्शनकारी छात्रों की ओर से विश्वविद्यालय अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सार्वजनिक माफी की शर्तें भी शामिल बताई गई हैं।

