रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर लग सकता है 100 प्रतिशत टैरिफ, भारत रूसी तेल का बड़ा आयातक
US Tariff on India(द भारत ख़बर), नई दिल्ली : रूस से कच्चा तेल आयात करना क्या फिर से भारत को महंगा पड़ सकता है। दरअसल अमेरिका दोबारा से उन देशों पर आर्थिक कार्रवाई की तैयारी में जुटा है जो इस समय रूस से कच्चा तेल आयात कर रहे हैं।
आने वाले दिनों में वह इन सभी देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगा सकता है। इसके लिए इस बार अमेरिकी राष्टÑपति नहीं बल्कि अमेरिकी संसद ने तैयारी की है। अमेरिकी सीनेट में दोनों प्रमुख दलों (रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक) के सांसदों ने रूस के खिलाफ एक सख्त आर्थिक प्रतिबंध विधेयक पेश किया है, जिसका सीधा असर भारत पर भी पड़ सकता है। इस नए संशोधित मसौदे के तहत रूस से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की खरीद जारी रखने वाले देशों पर अधिकतम 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है।
भारत को सूची में सबसे ऊपर रखा
विधेयक के दायरे में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे शीर्ष पांच तेल खरीदार देशों को रखा गया है। हालांकि, इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति को विशेष परिस्थितियों में राहत देने का अधिकार भी शामिल है और साथ ही रूस के ‘शैडो फ्लीट’ (गुप्त तेल टैंकरों) पर भी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
ज्ञात रहे कि साल 2022 से भारत ने सबसे ज्यादा कच्चा तेल आयात रूस से किया है। रूस ने इस अवधि के दौरान भारत को विशेष रियायतों के आधार पर तेल दिया। यदि अमेरिकी सीनेट द्वारा तैयार किया गया यह विधेयक पारित होता है, तो आने वाले समय में भारत के लिए अपनी ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक कूटनीति और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों के बीच संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
जून 2026 में भारत ने रूस से इतना तेल आयात किया
भारत ने जून 2026 में रूस से काफी ज्यादा कच्चा तेल मंगवाया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जून के महीने में भारत ने रूस से करीब 4.5 अरब यूरो यानी 4.5 बिलियन यूरो का कच्चा तेल खरीदा, जो रूस से टोटल ईंधन आयात का करीब 83% हिस्सा है। इसके साथ ही भारत रूस से हाइड्रोकार्बन खरीदने वाला चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा देश बना है।
अमेरिका ने पहले भी लगाया था 50 प्रतिशत टैरिफ
यह पहला मौका नहीं होगा जब अमेरिका भारत पर उच्च टैरिफ लगाएगा। दरअसल अगस्त 2025 में भी अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ इसलिए लगा दिया था क्योंकि भारत ने अमेरिका की चेतावनी के बावजूद रूस से कच्चे तेल का आयात जारी रखा था। हालांकि इसके कुछ माह बाद ही अमेरिकी दबाव के आगे झुकते हुए भारत ने रूस से तेल आयात बंद कर दिया था। जिसके बाद जनवरी 2026 में यह आंकड़ा अपने न्यूनतम स्तर पर चला गया था।
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