दो माह में दूसरी बार आया उछाल, विमानन कंपनियां फिर से बढ़ा सकती हैं किराया
Business News (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति का दबाव लगातार बना हुआ है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण होर्मुज जलडमरूमध्य का पिछले दो माह से बाधित होना है। एक अन्य कारण ईरान के द्वारा खाड़ी देशों के खिलाफ की गई कार्रवाई भी है जिससे उनका कच्चे तेल का उत्पादन प्रभावित हुआ है।
इस स्थिति के चलते एक तरफ जहां विश्व में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है वहीं अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के लिए विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) की कीमत में 5 फीसदी की वृद्धि कर दी गई है। कीमतों में लगातार दूसरे महीने उछाल आई है, क्योंकि तेल कंपनियों ने ऊर्जा की वैश्विक कीमतों में वृद्धि को समायोजित तरीके से आगे बढ़ाया है। हालांकि, घरेलू एयरलाइंस के लिए एटीएफ की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे में अनुमान है कि घरेलू उड़ानों का किराया नहीं बढ़ेगा।
1511.86 अमेरिकी डॉलर प्रति किलोलीटर हुई कीमत
एक मई के फैसले के बाद दिल्ली में एटीएफ की कीमतें 76.55 अमेरिकी डॉलर प्रति किलोलीटर या 5.33 फीसदी बढ़कर 1511.86 अमेरिकी डॉलर प्रति किलोलीटर हो गईं। एक अप्रैल को कीमतों में वृद्धि के बाद जेट फ्यूल एक मई को पांच फीसदी और महंगे हुए, यानी एक माह में दूसरी बार कीमतों में उछाल आया है। गौरतलब है कि जेट ईंधन की कीमतें दो दशक पहले विनियमित की गई थीं। पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में भारी उछाल आया था। सरकार और राज्य-स्वामित्व वाली तेल कंपनियों ने एक समायोजित दृष्टिकोण अपनाया है। विदेशी एयरलाइंस बाजार दरों का भुगतान करेंगी, जबकि घरेलू एयरलाइंस के लिए कीमतें नियंत्रित रखी गई हैं।
होर्मुज का बंद होना सबसे बड़ा कारण
तेल की कीमतों में तेजी आने के पीछे सबसे बड़ा कारण होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना है। यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जो फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ता है और दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से (20%) के तेल व्यापार के साथ-साथ तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की महत्वपूर्ण मात्रा को संभालता है। इसके अलावा, रुकी हुई शांति वार्ता के बीच अमेरिकी तथा ईरानी नेताओं के बीच लगातार हो रही बयानबाजी से भी आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। स्थिति यह है कि पिछले साल जो कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल था, इस महीने उसका औसत 114 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया है।
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