इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर वाहन खरीदारों में गाड़ियों के खराब होने का डर समा गया है। लोग अब पेट्रोल से चलने वाले वाहनों की जगह वैकल्पिक ईंधन वाली गाड़ियों को तरजीह दे रहे हैं। जुलाई महीने में सीएनजी, हाइब्रिड और ईवी वाहनों की कुल हिस्सेदारी 40.59% के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।
FADA के आंकड़ों से हुआ खुलासा
डीलरों की संस्था ‘फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन्स’ (FADA) ने गुरुवार को जुलाई के रजिस्ट्रेशन डेटा का आंकड़ा जारी किया, जिसमें कुल पैसेंजर गाड़ियों की बिक्री में वैकल्पिक ईंधन वाली गाड़ियों (CNG 24.67%, हाइब्रिड 8.02%, EV 7.90%) की हिस्सेदारी 40.59% के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। यह पेट्रोल वाली गाड़ियों की 41.68% हिस्सेदारी से सिर्फ 1.09 प्रतिशत अंक कम है, जबकि एक साल पहले यह अंतर 13.21 प्रतिशत अंक था।
ग्राहकों की पसंद बना वैकल्पिक ईंधन
इंडस्ट्री के जानकारों और अधिकारियों ने पहले कहा था कि वैकल्पिक ईंधन के प्रति ग्राहकों की पसंद की वजह वेस्ट एशिया संकट के कारण पेट्रोल की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी थी। हालांकि, FADA ने E20 फ्यूल को लेकर बढ़ती चिंता का भी जिक्र किया।
पहली बार 4 लाख का आंकड़ा पार
FADA के वाइस प्रेसिडेंट साई गिरिधर ने कहा, ”पैसेंजर व्हीकल की रिटेल बिक्री 4,16,555 यूनिट रही, जो साल-दर-साल आधार पर 19.13% ज्यादा है। जुलाई में पैसेंजर व्हीकल की बिक्री का 4 लाख का आंकड़ा पार करने का यह पहला मौका था। हालांकि, महीने दर महीने के आधार पर इसमें 1.68% की कमी आई।
बिक्री में ग्रामीण इलाकों का दबदबा
उन्होंने कहा, ”शहरी इलाकों में पैसेंजर व्हीकल की बिक्री में 15.76% की बढ़ोतरी के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में इसमें 24.72% की बढ़ोतरी हुई। डीलरों ने इसका श्रेय GST 2.0 से आई किफायती क्षमता, नई गाड़ियों के लॉन्च और स्कीम से मिली मदद को दिया। 44.05% डीलरों का कहना था कि OEM स्कीम से जुलाई में बुकिंग को बढ़ावा मिला, वहीं दूसरी ओर E20 फ्यूल में बदलाव को लेकर ग्राहकों की हिचकिचाहट ने खरीदारों को CNG, हाइब्रिड और EV की ओर आकर्षित किया।”
E20 पर लोगों के बीच छिड़ी बहस
उम्मीद से काफी पहले E20 फ्यूल (20% इथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल) को लॉन्च करने से लोगों के बीच बहस छिड़ गई है। इससे माइलेज कम होने, नमी और क्लोराइड के कारण इंजन में जंग लगने की आशंका और पुरानी या इसके अनुकूल न होने वाली गाड़ियों के लिए शुद्ध पेट्रोल न मिलने जैसी चिंताएं पैदा हुई हैं।

