नई दिल्ली. जब कभी भी भारतीय क्रिकेट इतिहास में टी20 की बात चलती है को सबसे पहले महेंद्र सिंह धोनी का नाम लिया जाता है. उन्होंने आईसीसी के पहले टी20 वर्ल्ड कप में भारत को चैंपियन बनाकर इतिहास रचा था. यह बात हर किसी को याद है और कई लोगों को ऐसा लगता है कि इस फॉर्मेट में टीम इंडिया की कप्तानी करने वाले माही पहले खिलाड़ी थे. हालांकि बहुत कम लोगों को पता है कि भारत की टी20 टीम के पहले कप्तान एमएस धोनी नहीं, बल्कि विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग थे.
भारत ने अपना पहला टी20 इंटरनेशनल मैच 1 दिसंबर 2006 को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जोहानिसबर्ग में खेला था. इस ऐतिहासिक मुकाबले के लिए वीरेंद्र सहवाग को टीम की कमान दी गई थी. भारत ने 127 रन का लक्ष्य चार विकेट खोकर हासिल किया. टी20 के नए फॉर्मेट में जीत के साथ शुरुआत की और सहवाग का नाम इतिहास के पन्ने में दर्ज हो गया. दिलचस्प बात यह रही कि सहवाग ने इसके बाद कभी भी टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम की कप्तानी नहीं की.

सहवाग ने भारत के लिए टी20 में कप्तानी की शुरुआत की लेकिन इसके कुछ महीनों बाद बीसीसीआई ने 2007 टी20 विश्व कप के लिए युवा विकेटकीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी को कप्तान बना दिया. इस फैसले को हर किसी को हैरानी हुई थी क्योंकि टीम में राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीरेंद्र सहवाग जैसे अनुभवी खिलाड़ी मौजूद थे. धोनी की कप्तानी में भारत ने पहले ही टी20 विश्व कप का खिताब जीत लिया. पाकिस्तान के खिलाफ खेले गए सांसे रोक देने वाले फाइनल में जीत मिली. इसके बाद धोनी लगातार टीम इंडिया की इस फॉर्मेट में कप्तानी करते रहे.
मीडिया रिपोर्टों और क्रिकेट जगत में यह चर्चा होती रही है कि 2007 टी20 विश्व कप से पहले कप्तानी को लेकर वरिष्ठ खिलाड़ियों की राय भी ली गई थी. कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि सचिन तेंदुलकर ने युवा नेतृत्व को मौका देने की वकालत की थी. जिसके बाद धोनी का नाम आगे बढ़ा. जियो सिनेमा से बात करते हुए सचिन ने इस बात का खुलासा किया था कि 2007 में कप्तानी से उन्होंने इनकार कर दिया था. इसके बाद एमएस धोनी के नाम की सिफारिश की थी. सचिन ने धोनी को टी20 का कप्तान बनाने की वजह भी बताई थी. सचिन ने कहा था कि धोनी का दिमाग स्थिर है, वह शांत और सहज रहते हैं.

