
मारीच और सुबाहु की लैंड जिहादी से की तुलना
Yogi Adityanath, (द भारत ख़बर), लखनऊ: जगद्गुरु रामभद्राचार्य की श्रीरामकथा में उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्य नाथ ने शिरकत की। इस मौके पर सीएम ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य को शॉल ओढ़ाया। इस दौरान जगद्गुरु 1 मिनट तक सीएम योगी के कान में कुछ कहते रहे। फिर पोटली से कुछ निकालकर सीएम को भेंट दिया। यह रामकथा पिछले 9 दिन से चल रही है।
आज कथा का अंतिम दिन है। इस मौके पर सीएम योगी ने उपस्थित लोगों को संबोधित भी किया। सीएम योगी ने कहा, प्रभु श्रीराम ने नारी गरिमा के लिए काम किया। यह आज के समय में लव जिहाद रोकने के लिए आदर्श उदाहरण है। शायद ही कोई ऐसा भारतीय हो, जिसके डीएनए में भारत हो और वह श्रीराम को न मानता हो।
रामकथा केवल सुनने का विषय नहीं, इसे समझना होगा
सीएम ने कहा, याद करिए रावण का राज्य था। खर और दूषण पूरे दंडकारण्य में कब्जा जमाए थे। ताड़का बक्सर तक आ गई थी। ये सब मिलकर पूरा उजाड़ मचाए हुए थे। जब भी नकारात्मक ताकतें आती हैं तो उजाड़ ही करती हैं। उन्होंने कहा- खर-दूषण और मारीच-सुबाहु क्या कर रहे थे? वो भी रावण के साथ लैंड जिहाद के अभियान में जुड़े हुए थे। साधु-संतों को उनकी जगह से हटाकर लैंड जिहाद करते थे। रामकथा केवल सुनने का विषय नहीं है। इसे सुनकर समझना होगा।
नकारात्मक ताकतों का डटकर मुकाबला करना होगा
योगी ने कहा, नकारात्मक ताकतें हर कालखंड में आएंगी, लेकिन सज्जन शक्ति को इनका डटकर मुकाबला करना होगा। राम जब पहली बार घर से निकले तो उन्हें सबसे पहले ताड़का मिली। वह रावण से प्रेरित थी। गलत को गलत ही मिलते हैं। जिसने भी राम को अपने जीवन का आदर्श बनाया, उसका कल्याण हुआ। जिसने राम का द्रोह किया, उसको इस धरती पर कोई जगह नहीं मिली।
हनुमान चालीसा में हर समस्या का समाधान
मारीच, रावण उच्च कुल और श्रेष्ठ व्यवस्था में जन्म लेते हैं और पशुवत मारे जाते हैं। क्योंकि, राम के साथ द्रोह करते हैं। हमारे पवनसुत हनुमानजी हैं, विभीषण हैं… इनको भले ही जन्म के समय सामान्य जीवन मिला। लेकिन, राम की संगत का असर हुआ कि ये पूज्य हो गए। हम सुबह जो 7 नाम लेते हैं, उनमें विभीषण का भी नाम है। हमारे यहां हर समस्या का समाधान हनुमान चालीसा है।
संत शक्ति सबको एकजुट कर आगे ले जाना चाहती है
सीएम ने कहा, निष्ठा नहीं रखते, जिनकी भारत के प्रति आस्था नहीं है, भारत के संस्कारों का सम्मान नहीं कर सकते, उन लोगों के लिए भारत की धरती धर्मशाला नहीं हो सकती। इस संकल्प के साथ हम सब आगे बढ़ेंगे। संत शक्ति सबको एकजुट कर आगे ले जाना चाहती है।
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