India-US Leaders Meet at UNGA: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के इतर भारत और अमेरिका के विदेश मंत्रियों की मुलाकात हुई। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से द्विपक्षीय संबंधों पर बात हुई। इस दौरान भारत ने रूस-ईरान को लेकर बनाए गए नए कानून SRIA को लेकर भारत की चिंता जताई। दरअसल इस कानून के तहत अमेरिका भारत समेत कई देशों पर 100% टैरिफ लगा सकता है। दोनों नेताओं ने मिडिल ईस्ट और यूक्रेन वॉर को लेकर भी चर्चा की। इस बैठक की जानकारी भारतीय विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दी।
SRIA को लेकर क्या है भारत की चिंता?
अमेरिका में हाल ही में लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रसिया एंड ईरान एक्ट (SRIA) लागू किया गया है। इसके तहत अमेरिकी प्रशासन को रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और रूसी ऊर्जा खरीदने वाले कुछ देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की शक्ति मिलती है। कानून के तहत संबंधित देशों के आयात पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। भारत और चीन रूसी कच्चे तेल के बड़े खरीदार हैं। ऐसे में इन देशों पर 100% टैरिफ का खतरा मंडरा रहा है। यही वजह है कि भारत इस कानून के संभावित आर्थिक और ऊर्जा संबंधी प्रभावों को लेकर अमेरिका के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट कर रहा है। भारत पहले भी कह चुका है कि उसकी ऊर्जा नीति का एक प्रमुख उद्देश्य देश की ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक हितों को सुरक्षित रखना है।
रुबियो ने मुलाकात के बाद क्या कहा?
जयशंकर की पोस्ट के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी बैठक की जानकारी दी। रुबियो ने कहा कि दोनों देश अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने, प्रमुख क्षेत्रीय प्राथमिकताओं पर समन्वय और आगामी बहुपक्षीय प्रयासों पर काम कर रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों को लेकर मतभेदों के बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक सहयोग का एजेंडा जारी है। भारत और अमेरिका के संबंधों में व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, तकनीक और हिंद-प्रशांत जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं।
जुलाई में मनीला में भी हुई थी मुलाकात
जयशंकर और रुबियो की यह मुलाकात इस साल दोनों नेताओं की लगातार चल रही उच्चस्तरीय बातचीत का हिस्सा है। इससे पहले जुलाई में मनीला में ASEAN और Quad से जुड़ी बैठकों के दौरान दोनों नेताओं ने मुलाकात की थी। मनीला बैठक में व्यापार और टैरिफ, ऊर्जा, रक्षा एवं सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी। दोनों ने क्षेत्रीय, वैश्विक और बहुपक्षीय मुद्दों पर भी विचार साझा किए थे। उस समय अमेरिकी अधिकारियों ने भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में प्रगति का संकेत भी दिया था।
ऊर्जा सुरक्षा बना अहम मुद्दा
रूस से भारत की ऊर्जा खरीद इस पूरे विवाद का महत्वपूर्ण पहलू है। अगस्त 2026 में भारत का रूस से तेल आयात 16.5 प्रतिशत घटकर लगभग 21 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया था और सितंबर में इसमें और कमी आने का अनुमान था। इसके बावजूद रूस भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में बना हुआ है। भारत की ओर से रूसी तेल खरीद में बदलाव और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की तलाश ऐसे समय में हो रही है, जब अमेरिकी प्रतिबंध कानून के संभावित प्रभाव को लेकर नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच बातचीत जारी है।

