जर्मनी की दिग्गज कंपनी थिसनक्रुप मरीन सिस्टम्स के साथ डील फाइनल
AIP Submarines, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: भारतीय नौसेना को समंदर का नया सिकंदर बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली है। देश के सबसे बड़े सबमरीन प्रोजेक्ट यानी प्रोजेक्ट-75I को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। सरकारी क्षेत्र की कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने 6 अत्याधुनिक डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक सबमरीन्स के निर्माण के लिए जर्मनी की दिग्गज कंपनी थिसनक्रुप मरीन सिस्टम्स के साथ व्यावसायिक बातचीत पूरी कर ली है।
रक्षा क्षेत्र का यह मेगा सौदा करीब 99 हजार करोड़ रुपये का है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच बातचीत का दौर पूरा हो चुका है और जल्द ही इस ऐतिहासिक डील पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये सभी 6 पनडुब्बियां उन्नत फ्यूल-सेल आधारित एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन तकनीक से लैस होंगी।
एआईपी तकनीक क्यों है खास?
आमतौर पर पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को अपनी बैटरी चार्ज करने के लिए हर कुछ दिनों में समुद्र की सतह पर आना पड़ता है, जिससे दुश्मन के रडार या सैटेलाइट की नजरों में आने का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन जर्मनी की इस आधुनिक फ्यूल-सेल एआईपी तकनीक की मदद से ये पनडुब्बियां बिना सतह पर आए, हफ्तों तक पानी के अंदर गहरे समुद्र में छिपी रह सकती हैं। रासायनिक प्रतिक्रिया से बिजली बनाने के कारण यह सिस्टम बेहद शांत है, जो इन पनडुब्बियों को साइलेंट हंटर यानी अदृश्य शिकारी बना देता है।
आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा
ये पूरा प्रोजेक्ट मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रणनीतिक साझेदारी मॉडल पर आधारित है। इसके तहत विदेशी तकनीक का भारत में ट्रांसफर किया जाएगा और इन सभी पनडुब्बियों का निर्माण स्वदेशी रूप से मझगांव डॉक में होगा।
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